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130 दिनों तक रोज़ सिर्फ कृतज्ञ रहने और शुकराना करने से कैसे बदल ही गई मेरी दुनिया, मन पर पड़ा क्या प्रभाव? बिज़नेसमैन ने साझा किया अनुभव

How does gratitude change our life: 30 दिनों के लिए एक प्रयोग करके देखें. इस दौरान जो भी बातें आपके साथ अच्छी है उनके लिए कृतज्ञता व्यक्त करें. मन में कृतज्ञता का भाव आने से जीवन में कई पॉजिटिव चेंज आते हैं.

130 दिनों तक रोज़ सिर्फ कृतज्ञ रहने और शुकराना करने से कैसे बदल ही गई मेरी दुनिया, मन पर पड़ा क्या प्रभाव? बिज़नेसमैन ने साझा किया अनुभव
How does gratitude change our life?

How does gratitude change our life? : प्रवीण एक बिज़नेसमैन हैं और अपनी लाइफ में अब बहुत खुश हैं. वे करोल बाग में अपनी एक होम्योपैथिक शॉप और क्लिनिक चलाते हैं. बिज़नेस के दबाव, परिवार के लिए कम समय और काम से जुड़े तमाम उतार-चढ़ावों से वे अक्सर तनाव में रहते थे और खुद से सवाल करते थे कि लाइफ इतनी कठिन क्यों है, क्यों चीजें उनके जीवन में आसान नहीं हैं और क्यों हर बार उनके साथ ही कोई बुरी घटना हो रही है... इस तरह के ख्यालों से अक्सर प्रवीण खुद को परेशान कर लेते थे.

ऐसा अक्सर होता है, दिन भर की भागदौड़ के बाद जब इंसान पीछे मुड़कर देखता है, तो ध्यान अक्सर उन्हीं बातों पर जाता है जो ठीक नहीं हुईं. क्या कमी रह गई, किस बात का अफसोस है, या किससे तुलना हो रही है. धीरे-धीरे यही सोच मन की आदत बन जाती है. लेकिन अगर इसी पैटर्न को बदलकर रोज़ कुछ मिनट उन चीजों पर ध्यान दिया जाए जो पहले से अच्छी हैं, तो सोच का पूरा ढांचा बदलने लगता है.प्रवीण ने भी कुछ ऐसा ही किया. प्रवीण कहते हैं -

'मेरे एक दोस्त ने एक बार मुझसे कहा कि यार तेरे पास कितना कुछ है, तू तब भी शिकायतें ही करता है. शायद इसलिए ही तू परेशान रहता है. उन लोगों को देख जिनके पास इतना भी नहीं. खुद को किस्मत वाला मान कि भगवान ने इतना कुछ तुझे दिया है और कृतज्ञता व्यक्त कर, शुकराना कर रब्ब का...'

प्रवीण कहते हैं कि एक बार तो मुझे उसकी बात चुभी, लेकिन उसके बाद मैंने सोचा कि बचपन का दोस्त है, क्यों न एक बार ट्रायल के लिए ही सही उसकी बात मान ली जाए.

और मैंने तय किया कि अब कम से कम 3 महीने कोई शिकायत नहीं करूंगा, जो भी होगा मैं बस ग्रेटिट्यूट में रहूंगा. अगर कुछ बेहतर नहीं भी हुआ तो कुछ बिगड़ेगा भी नहीं.

प्रवीण ने यह एक प्रयोग करके देखा और इसका उनके जीवन पर ऐसा असर हुआ कि अब वे सभी को ऐसा प्रयोग करने की सलाह देते हैं. उन्होंने ये प्रयोग महज 3 महीने के लिए शुरू किया था, लेकिन कब वह उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया, इसका पता उन्हें भी नहीं चला.इस दौरान जो भी बातें आपके साथ अच्छी हैं, उनके लिए कृतज्ञता व्यक्त करें. मन में कृतज्ञता का भाव आने से जीवन में कई पॉजिटिव चेंज आते हैं. इस बिज़नेसमैन ने बताया कि शुरुआत में आदतन वे नकारात्मक ही सोचते थे और कृतज्ञ होने और शुकराना करने के लिए उन्हें खुद को फोर्स करना पड़ता था. लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसकी आदत हो गई.. 

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कृतज्ञता होती क्या है और किसके प्रति होनी चाहिए

प्रवीण ने कहा कि कृतज्ञता का मतलब सिर्फ “धन्यवाद” कहना नहीं है. यह उस बात को पहचानना है कि जीवन में क्या-क्या ऐसा है, जो हमारे पक्ष में काम कर रहा है.  यह भावना किसी एक तक सीमित नहीं होती. ईश्वर या प्रकृति के प्रति, उन लोगों के प्रति जिन्होंने साथ दिया, रोजमर्रा में मदद करने वाले लोगों के प्रति, अपनी परिस्थितियों से मिली सीख के प्रति और खुद के प्रयासों के प्रति भी कृतज्ञता महसूस की जा सकती है. जब व्यक्ति इन चीजों को नोटिस करना शुरू करता है, तो उसका फोकस नेगेटिव बातों से हटकर पॉजिटिव पर आ जाता है.

कृतज्ञता जताने से क्या होता है (What happens when you express gratitude?)

मूड और सोच पर असर :  रोज़ कृतज्ञता पर ध्यान देने से दिमाग बार-बार उसी दिशा में सोचने लगता है. इससे नकारात्मक बातों पर अटकने की आदत धीरे-धीरे कम होती है. व्यक्ति छोटी-छोटी चीजों में भी संतोष महसूस करने लगता है, जिससे मूड ज्यादा स्थिर रहता है.

तनाव कम होने लगता है : जब ध्यान बार-बार इस बात पर जाता है कि क्या ठीक है, तो अनावश्यक चिंता का दबाव थोड़ा कम होता है. इससे मन हल्का महसूस करता है और हर बात को लेकर ओवरथिंकिंग कम हो सकती है.

रिश्तों में फर्क दिखता है : कृतज्ञता का असर व्यवहार में भी दिखता है. जब व्यक्ति दूसरों के प्रति आभार महसूस करता है, तो बातचीत का तरीका बदलता है. इससे रिश्तों में सहजता और समझ बढ़ती है.

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खुद के प्रति नजरिया बदलता है

अक्सर लोग अपनी गलतियों पर ज्यादा ध्यान देते हैं और अपनी कोशिशों को नजरअंदाज कर देते हैं. कृतज्ञता की आदत खुद के प्रयासों को पहचानने में मदद करती है, जिससे आत्मविश्वास धीरे-धीरे बेहतर होता है.

कृतज्ञता को भाव आपके सोचने का तरीका बदल देता है. क्या नहीं है के बजाय आपका ध्यान क्या उपलब्ध है इस बात पर ज्यादा होता है. ऐसे में मन ज्यादा शांत, संतुलित और स्थिर महसूस करने लगता है. यही बदलाव आगे चलकर जीवन के दूसरे हिस्सों में भी नजर आने लगता है.

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