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45 डिग्री में भी कैसे ठंडे रहते थे पुराने भारतीय घर, AC नहीं, जान लीजिए मिट्टी के घरों का साइंस

Ways to Keep Your House Cool: क्या आप जानते हैं कि पुराने भारतीय घर जो मिट्टी से बनाए जाते थे वह गर्मियों में ठंडे कैसे रहते थे, और आज के समय में कंक्रीट वाले घरों को कैसे भीषण गर्मी में भी ठंडा रखा जा सकता है? चलिए यहां जानते हैं.

45 डिग्री में भी कैसे ठंडे रहते थे पुराने भारतीय घर, AC नहीं, जान लीजिए मिट्टी के घरों का साइंस

Ways to Keep Your House Cool: आज जब गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो शहरों में बिना एसी या कूलर के रहना लगभग असंभव लगता है. लेकिन, अगर हम कुछ दशक पीछे जाएं, तो पाएंगे कि भारत के गांवों और कस्बों में बने पुराने घरों में लोग इतनी ही भीषण गर्मी में भी आराम से रहते थे. उस समय न एयर कंडीशनर थे और न ही हाई-टेक कूलिंग सिस्टम. फिर भी इन घरों के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी कम रहता था. दरअसल, पुराने भारतीय घर केवल रहने की जगह नहीं होते थे, बल्कि वे नेचुरल साइंस और पारंपरिक वास्तुकला (Traditional Architecture) का शानदार उदाहरण थे. मिट्टी, चूना, लकड़ी और मोटी दीवारों से बने ये घर गर्मी को अंदर आने से रोकते थे और प्राकृतिक रूप से ठंडक बनाए रखते थे. आज मॉडर्न कंक्रीट के घरों में यह नेचुरल बैलेंस काफी हद तक खो गया है. यही कारण है कि अब हमें गर्मी से राहत पाने के लिए बिजली पर निर्भर होना पड़ता है.

आखिर मिट्टी के पुराने भारतीय घर इतने ठंडे कैसे रहते थे? | How Did the old Indian Mud Houses Stay So Cool?

1. मिट्टी की दीवारें करती थी नेचुरल इंसुलेशन का कमाल

मिट्टी से बनी मोटी दीवारें गर्मी को जल्दी अंदर नहीं आने देतीं. मिट्टी में थर्मल इंसुलेशन की क्षमता होती है, यानी यह तापमान को धीरे-धीरे अंदर आने देती है. दिन की तेज गर्मी दीवारों में धीरे-धीरे प्रवेश करती है और जब तक वह अंदर पहुंचती है, तब तक बाहर का तापमान कम होने लगता है. इस कारण घर का अंदरूनी माहौल ठंडा बना रहता है.

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2. मोटी दीवारें और ऊंची छत

पुराने घरों की दीवारें अक्सर 12 से 18 इंच तक मोटी होती थीं और छत भी काफी ऊंची बनाई जाती थी. ऊंची छत होने से गर्म हवा ऊपर चली जाती है और नीचे का हिस्सा ठंडा रहता है. यह नेचुरल एयर सर्कुलेशन का बेहतरीन उदाहरण है.

3. आंगन का डिजाइन

कई पारंपरिक भारतीय घरों में बीच में खुला आंगन होता था. दिन के समय आंगन से ताजी हवा घर में प्रवेश करती थी और गर्म हवा बाहर निकल जाती थी. इससे घर के अंदर हवा का प्रवाह बना रहता था और वातावरण ठंडा रहता था.

4. चूने और गोबर की लेप

पुराने समय में घरों की दीवारों और फर्श पर चूना या गोबर का लेप किया जाता था. चूना सूरज की गर्मी को परावर्तित (Reflect) करता है और घर को ठंडा बनाए रखने में मदद करता है. यही कारण है कि कई पुराने मकानों में आज भी यह तरीका अपनाया जाता है.

5. पेड़-पौधों का इस्तेमाल

पुराने घरों के आसपास अक्सर नीम, पीपल या आम के पेड़ लगाए जाते थे. ये पेड़ छाया देते थे और आसपास का तापमान स्वाभाविक रूप से कम करते थे. पेड़ों से आने वाली ठंडी हवा घर के वातावरण को और आरामदायक बना देती थी.

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आज के समय में घर को ठंडा रखने के आसान और असरदार उपाय

1. छत को ठंडा रखें

घर की सबसे ज्यादा गर्मी छत से आती है क्योंकि दिनभर उस पर सीधी धूप पड़ती है. छत पर सफेद पेंट या रिफ्लेक्टिव कोटिंग करवाएं. मिट्टी के घड़े या गमले रखकर भी छत की गर्मी कम की जा सकती है. कुछ लोग छत पर घास या टाइल्स भी लगाते हैं जिससे तापमान कम होता है.

2. खिड़कियों पर पर्दे या ब्लाइंड्स लगाएं

धूप सीधे कमरे में आती है तो कमरा जल्दी गर्म हो जाता है. खिड़कियों पर मोटे पर्दे या ब्लैकआउट कर्टेन लगाएं. दिन के समय धूप वाली खिड़कियां बंद रखें. शाम को खिड़कियां खोलकर हवा का प्रवाह बढ़ाएं.

3. घर में पौधे लगाएं

पौधे प्राकृतिक रूप से वातावरण को ठंडा करते हैं. बालकनी और खिड़की के पास पौधे रखें. मनी प्लांट, एलोवेरा और अरेका पाम जैसे पौधे अच्छे रहते हैं. ये हवा को भी शुद्ध करते हैं और घर को ठंडा महसूस कराते हैं.

4. क्रॉस वेंटिलेशन बनाएं

अगर घर में हवा का सही रास्ता हो तो गर्मी कम महसूस होती है. सामने-सामने की खिड़कियां खोलने से क्रॉस वेंटिलेशन बनता है. इससे गर्म हवा बाहर निकलती है और ठंडी हवा अंदर आती है.

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5. हल्के रंगों का इस्तेमाल करें

दीवारों और पर्दों में हल्के रंग (सफेद, क्रीम, हल्का नीला) इस्तेमाल करें. हल्के रंग गर्मी को कम सोखते हैं और कमरा ठंडा रखने में मदद करते हैं.

6. अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद रखें

टीवी, लैपटॉप, चार्जर और अन्य उपकरण भी गर्मी पैदा करते हैं. जब जरूरत न हो तो इन्हें बंद रखें. इससे बिजली की बचत भी होगी और कमरे की गर्मी भी कम होगी.

7. पानी का इस्तेमाल करें

पुराने समय में लोग घर के आंगन या फर्श पर पानी छिड़कते थे. शाम के समय फर्श या बालकनी में पानी का हल्का छिड़काव करने से वातावरण ठंडा हो जाता है. कूलर के सामने पानी से भरी बाल्टी रखने से भी ठंडी हवा मिलती है.
 

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