Ultra-Processed Foods Linked to Lower Male Fertility: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स जैसे प्रोसेस्ड मीट, चीनी रिच ड्रिंक्स और ट्रांस फैटी एसिड्स का कम मात्रा में सेवन भी डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है. यह तो सभी जानते हैं, लेकिन एक नई रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि बहुत ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से न सिर्फ पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है, बल्कि शुरुआती भ्रूण का विकास भी धीमा हो सकता है.

स्टडी ने क्या बताया?
नीदरलैंड्स के रॉटरडैम में इरास्मस यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में डेवलपमेंटल एपिडेमियोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर और पीडियाट्रिशियन, मुख्य रिसर्चर डॉ. रोमी गैलार्ड ने कहा, "हालांकि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना हमारी डाइट में बहुत आम है, लेकिन फर्टिलिटी के नतीजों और शुरुआती इंसानी विकास के साथ इसके संभावित संबंध के बारे में बहुत कम जानकारी है."
स्टडी कैसे की गई?
'ह्यूमन रिप्रोडक्शन' जर्नल में छपी इस स्टडी में 831 महिलाओं और 651 पुरुषों को शामिल किया गया. इनका डेटा प्रेग्नेंसी से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान लिया गया. दोनों पार्टनर्स ने अपने खाने की जानकारी एक फॉर्म में दी. डॉक्टरों ने प्रेग्नेंसी के 7वें, 9वें और 11वें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड किया. इसमें भ्रूण का आकार और योक सैक (yolk sac) यानी बच्चे को शुरुआती पोषण देने वाला भाग नापा गया.
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना और फर्टिलिटी: नई स्टडी में क्या निकला?*
महिलाओं की बात करें, तो ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने वाली महिलाओं में भ्रूण का आकार थोड़ा छोटा पाया गया, योक सैक भी थोड़ा छोटा था, जबकि यह भ्रूण के शुरुआती विकास के लिए बहुत होता है. हालांकि गर्भ ठहरने में महिलाओं के मामले में बहुत बड़ा फर्क नहीं दिखा.
वहीं, पुरुषों की बात करें, तो जरूरत से ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने वालों में फर्टिलिटी कम होती दिखी, जिसका मतलब है गर्भ ठहरने में ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन पुरुषों के अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने का भ्रूण के शुरुआती विकास पर असर नहीं दिखा.
गैलार्ड ने सुझाव दिया कि यूपीएफ (अल्ट्रा फैटी एसिड) की कम मात्रा वाला आहार दोनों भागीदारों के लिए सबसे अच्छा होगा, न केवल उनके अपने स्वास्थ्य के लिए, बल्कि उनकी गर्भावस्था की संभावनाओं और अजन्मे बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए भी.
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