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तनाव, जल्दबाजी या थ्रील, 70 फीसदी सड़क हादसों के पीछे है ओवरस्‍पीड‍िंग, हाई-स्पीड लाइफस्टाइल का खतरनाक साइड इफेक्ट्स

Road Accident Causes: सवाल यह है कि आखिर हाई-स्पीड लाइफस्टाइल सड़क पर इतनी जानलेवा क्यों साबित हो रही है? और हमें इससे बचने के लिए अपनी डेली लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने होंगे.

तनाव, जल्दबाजी या थ्रील, 70 फीसदी सड़क हादसों के पीछे है ओवरस्‍पीड‍िंग, हाई-स्पीड लाइफस्टाइल का खतरनाक साइड इफेक्ट्स
Road Accident Causes: आखिर हाई-स्पीड लाइफस्टाइल सड़क पर इतनी जानलेवा क्यों साबित हो रही है?

High-speed Lifestyle: आज की जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है. तेज इंटरनेट, तेज फैसले, तेज करियर और तेज गाड़ियां हर चीज में स्पीड हमारी प्राथमिकता बन चुकी है. हम कम समय में ज्यादा हासिल करना चाहते हैं और इसी जल्दीबाजी की कीमत अक्सर सड़क हादसों के रूप में चुकानी पड़ती है. अखबारों और सोशल मीडिया पर रोज दुर्घटनाओं की खबरें आम हो गई हैं. लगभग 70 फीसदी सड़क हादसों के पीछे है ओवरस्‍पीड‍िंग है. लेकिन ,सवाल यह है कि आखिर हाई-स्पीड लाइफस्टाइल सड़क पर इतनी जानलेवा क्यों साबित हो रही है? और हमें इससे बचने के लिए अपनी डेली लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने होंगे.

भारत में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) का डेटा बताता है कि भारत में जानलेवा सड़क हादसों का मुख्य कारण ओवर-स्पीडिंग है, जिससे सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 68 से 75 प्रतिशत मौतें होती हैं. डेटा से पता चलता है कि 2022 और 2023 में, स्पीड से जुड़े उल्लंघन कुल मौतों के 70 प्रतिशत से ज्यादा के लिए जिम्मेदार थे, कुछ रिपोर्टों में स्पीड उल्लंघन के कारण 72.4 प्रतिशत दुर्घटनाएं और 75.2 प्रतिशत मौतें बताई गई हैं.

हाई-स्पीड लाइफस्टाइल सड़क पर इतनी जानलेवा क्यों? | Why is the High-speed Lifestyle So Deadly On the Roads? 

1. जल्दी है वाली मानसिकता

आज हर किसी को जल्दी है ऑफिस पहुंचना है, मीटिंग अटेंड करनी है, बच्चों को स्कूल छोड़ना है. इस जल्दबाज़ी में हम स्पीड लिमिट को नजरअंदाज़ कर देते हैं. तेज रफ्तार पर गाड़ी चलाने से ब्रेक लगाने का समय कम मिलता है और जरा-सी चूक बड़ा हादसा बन जाती है.

2. मोबाइल और मल्टीटास्किंग ड्राइविंग

ड्राइव करते हुए कॉल लेना, मैसेज पढ़ना या नेविगेशन सेट करना अब आम बात हो गई है. दिमाग एक साथ कई काम करने लगता है, जिससे ध्यान सड़क से हट जाता है. रिसर्च बताती है कि मोबाइल देखते हुए गाड़ी चलाना नशे में ड्राइविंग जितना ही खतरनाक हो सकता है.

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3. थकान, तनाव और नींद की कमी

हाई-स्पीड लाइफस्टाइल सिर्फ रफ्तार नहीं, मेंटल प्रेशर भी लाती है. देर रात तक काम, कम नींद और लगातार तनाव रिफ्लेक्स को धीमा कर देता है. थका हुआ दिमाग सही निर्णय नहीं ले पाता और सड़क पर यह जानलेवा साबित हो सकता है.

4. ताकतवर गाड़ियां, लेकिन कम जिम्मेदारी

आज कारें और बाइक पहले से ज्यादा तेज और पावरफुल हैं. तकनीक ने रफ्तार बढ़ाई, लेकिन ड्राइविंग डिसिप्लिन उतनी तेजी से नहीं बढ़ा. सीट बेल्ट न लगाना, हेलमेट न पहनना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ा देती है.

5. मौसम और खराब परिस्थितियां

बारिश, कोहरा या रात का समय इन हालात में विजिबिलिटी कम हो जाती है. हाई-स्पीड में छोटी-सी फिसलन भी बड़ा हादसा करा सकती है, खासकर जब ड्राइवर पहले से थका या डिस्ट्रैक्ट हो.

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बचाव के आसान लेकिन असरदार तरीके:

  • स्पीड लिमिट का पालन करें.
  • ड्राइव करते समय मोबाइल दूर रखें.
  • पर्याप्त नींद लें और थकान में ड्राइव न करें.
  • सीट बेल्ट और हेलमेट जरूर पहनें.
  • मौसम के हिसाब से रफ्तार कम रखें.

हाई-स्पीड लाइफस्टाइल ने हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसकी कीमत सड़क पर बढ़ते हादसों के रूप में सामने आ रही है. याद रखिए कुछ मिनट देर से पहुंचना, कभी न पहुंच पाने से बेहतर है.

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