Deep Cleaning of AC: कई बार AC की सर्विस कराने के बाद भी ठंडक ठीक नहीं लगती. ऐसे में लोग कंफ्यूज हो जाते हैं—नॉर्मल सर्विस काफी है या डीप क्लीनिंग करानी चाहिए? गर्मी बढ़ते ही एयर कंडीशनर की सर्विसिंग कराना लगभग हर घर की जरूरत बन जाता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि सर्विस कराने के कुछ ही दिनों बाद AC की कूलिंग फिर से कम लगने लगती है. ऐसे में लोग समझ नहीं पाते कि समस्या मशीन में है या फिर सर्विस ठीक से नहीं हुई. AC की नॉर्मल सर्विस और डीप क्लीनिंग में क्या फर्क है? जानिए कब कौन‑सी सर्विस करानी चाहिए और किससे कूलिंग बेहतर होती है-
असल में, यहीं पर AC की नॉर्मल सर्विस और डीप क्लीनिंग के बीच का फर्क समझना जरूरी हो जाता है. क्योंकि कई मामलों में सिर्फ ऊपर‑ऊपर की सफाई से काम नहीं चलता और अंदर जमी गंदगी कूलिंग पर असर डालती रहती है
AC की नॉर्मल सर्विस और डीप क्लीनिंग में क्या फर्क है?
AC की नॉर्मल सर्विस क्या है : नॉर्मल AC सर्विस एक बेसिक सफाई प्रक्रिया होती है. इसमें आमतौर पर जेट वॉश की मदद से फिल्टर और कंडेंसर को साफ किया जाता है, जिससे धूल‑मिट्टी हट जाती है और कूलिंग थोड़ी बेहतर हो जाती है. इस दौरान टेक्नीशियन गैस लेवल भी चेक करते हैं और जरूरत पड़ने पर गैस भरवाने की सलाह दी जाती है.
AC की डीप क्लीनिंग क्या है : वहीं AC की डीप क्लीनिंग एक ज्यादा गहराई वाली प्रक्रिया होती है. इसमें AC के अंदरूनी हिस्सों को खोलकर साफ किया जाता है और कई बार केमिकल वॉश का इस्तेमाल भी किया जाता है. यही वजह है कि यह प्रक्रिया ज्यादा समय लेती है, लेकिन इसका असर भी लंबे समय तक नजर आता है.
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AC की कूलिंग कम हो रही है? नॉर्मल सर्विस और डीप क्लीनिंग का फर्क समझें.
कब करानी चाहिए नॉर्मल सर्विस और कब डीप क्लीनिंग?
अगर आपका AC नया है या हाल ही में खरीदा गया है, तो नॉर्मल सर्विस आमतौर पर काफी होती है. लेकिन अगर AC 5 से 7 साल पुराना हो चुका है और बार‑बार सर्विस कराने के बावजूद कूलिंग सही नहीं हो रही, तो ऐसे में डीप क्लीनिंग ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है.
खास बात यह भी है कि स्प्लिट AC में डीप क्लीनिंग की जरूरत ज्यादा पड़ती है, क्योंकि इसकी इंडोर यूनिट में गंदगी और ब्लॉकेज जल्दी जमा हो जाते हैं. वहीं विंडो AC में अक्सर नॉर्मल सर्विस से ही काम चल जाता है.
वहीं डीप क्लीनिंग इससे कहीं ज्यादा एडवांस और गहराई वाली प्रोसेस है. इसमें AC के पार्ट्स खोलकर साफ किए जाते हैं और कई हिस्सों को केमिकल वॉश भी किया जाता है. यही वजह है कि यह ज्यादा समय लेती है, लेकिन इसका असर भी ज्यादा होता है, खासकर तब जब AC की कूलिंग लगातार कम हो रही हो.

AC सर्विस के बाद भी ठंडक नहीं मिल रही? जानिए डीप क्लीनिंग कब जरूरी है.Photo Credit: (Photo: Canva)
कब करानी चाहिए कौन-सी सर्विस?
अगर आपका AC नया है या हाल ही में खरीदा गया है, तो नॉर्मल सर्विस ही काफी होती है. लेकिन अगर AC 5–7 साल पुराना हो चुका है या बार-बार सर्विस के बाद भी कूलिंग ठीक नहीं हो रही, तो डीप क्लीनिंग ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है.
खास बात यह भी है कि स्प्लिट AC में डीप क्लीनिंग की जरूरत ज्यादा पड़ती है, क्योंकि इसकी इंडोर यूनिट में गंदगी और ब्लॉकेज ज्यादा जमा होते हैं, जबकि विंडो AC में नॉर्मल सर्विस से ही काफी हद तक सफाई हो जाती है.
AC की नॉर्मल सर्विस और डीप क्लीनिंग में कितना आता है खर्च?
खर्च की बात करें तो यही वह जगह है जहां सबसे ज्यादा फर्क दिखता है. नॉर्मल AC सर्विस आमतौर पर करीब 700 से 1000 रुपये के बीच हो जाती है. वहीं विंडो AC की डीप क्लीनिंग लगभग 1200 रुपये तक पड़ सकती है, जबकि स्प्लिट AC की डीप क्लीनिंग का खर्च करीब 2000 रुपये तक पहुंच जाता है. यानी साफ है कि नॉर्मल सर्विस का खर्च कम होता है, जबकि डीप क्लीनिंग के लिए आपको इससे ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं.
गलत सर्विस चुनने से क्या नुकसान हो सकता है?
अक्सर लोग हर बार सिर्फ “सर्विस” करवा लेते हैं, जबकि समस्या अंदर जमी गंदगी या ब्लॉकेज की होती है, जो सिर्फ डीप क्लीनिंग से ही ठीक होती है. दूसरी तरफ, कुछ लोग हर साल डीप क्लीनिंग करवा लेते हैं, जबकि इसकी जरूरत 2–3 साल में या फिर आपके एयर कंडीशनर की हालत पर निर्भर होती है. यानि अगर सही समय पर सही सर्विस चुनी जाए, तो न सिर्फ कूलिंग बेहतर होती है बल्कि फालतू खर्च से भी बचा जा सकता है.
गलत सर्विस चुनने से क्या नुकसान हो सकता है?
अगर AC के लिए सही समय पर सही सर्विस नहीं चुनी गई, तो इसका सीधा असर कूलिंग, बिजली के बिल और मशीन की उम्र पर पड़ता है.
1. AC की कूलिंग लगातार कम होना
अगर अंदर जमी गंदगी के बावजूद सिर्फ नॉर्मल सर्विस कराई जाती है, तो फिल्टर और कॉइल पूरी तरह साफ नहीं हो पाते. इससे AC चल तो जाता है, लेकिन ठंडक पहले जैसी नहीं मिलती.
2. बिजली का बिल बढ़ना
गंदी कॉइल और ब्लॉकेज की वजह से AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसका नतीजा यह होता है कि यूनिट ज्यादा बिजली खपत करती है और पावर बिल बढ़ जाता है.
3. बार‑बार सर्विस कराने का खर्च
जब डीप क्लीनिंग की जरूरत होती है और सिर्फ नॉर्मल सर्विस कराई जाती है, तो समस्या बार‑बार सामने आती है. ऐसे में हर कुछ महीनों में सर्विस का खर्च देना पड़ता है.

4. AC के पार्ट्स जल्दी खराब होना
अंदर नमी, धूल और फंगस जमा रहने से कॉइल, ड्रेनेज और फैन जैसे पार्ट्स पर दबाव बढ़ता है. इससे उनकी लाइफ कम हो सकती है और महंगे रिपेयर की नौबत आ सकती है.
5. बेकार में ज्यादा पैसे खर्च होना
कई लोग हर साल बिना जरूरत डीप क्लीनिंग करा लेते हैं, जबकि नॉर्मल सर्विस ही काफी होती है. इससे बिना वजह ज्यादा खर्च करना पड़ता है.
नतीजा:
अगर AC की हालत और जरूरत देखकर सही सर्विस चुनी जाए, तो कूलिंग बेहतर रहती है, बिजली का बिल कंट्रोल में रहता है और फालतू खर्च से भी बचा जा सकता है.
FAQ
Q1. AC की डीप क्लीनिंग क्यों जरूरी होती है?
क्योंकि अंदर जमी गंदगी और ब्लॉकेज नॉर्मल सर्विस से पूरी तरह साफ नहीं हो पाती.
Q2. क्या हर साल डीप क्लीनिंग कराना जरूरी है?
नहीं, आमतौर पर 2–3 साल में एक बार या जरूरत पड़ने पर ही करानी चाहिए.
Q3. स्प्लिट AC में डीप क्लीनिंग ज्यादा क्यों जरूरी होती है?
क्योंकि इसकी इंडोर यूनिट में धूल और नमी ज्यादा जमा होती है.
Q4. क्या सिर्फ नॉर्मल सर्विस से कूलिंग बेहतर हो सकती है?
अगर AC नया है, तो हां. लेकिन पुराने AC के लिए डीप क्लीनिंग जरूरी हो सकती है.
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