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सिर्फ 30 सेकंड का टेस्ट बताएगा आपके दिमाग की स्पीड, जानिए रिएक्शन टाइम से कैसे पता चलता है ब्रेन हेल्थ का हाल

Brain Speed Test: 30 सेकंड का रिएक्शन टाइम टेस्ट आपके दिमाग की प्रोसेसिंग स्पीड का एक छोटा सा संकेत दे सकता है. यह किसी बीमारी को पकड़ने का एकमात्र तरीका नहीं है, लेकिन इससे आने वाली समस्या का अंदाजा लगाया जा सकता है.

सिर्फ 30 सेकंड का टेस्ट बताएगा आपके दिमाग की स्पीड, जानिए रिएक्शन टाइम से कैसे पता चलता है ब्रेन हेल्थ का हाल
रिएक्शन टाइम यानी किसी संकेत पर रिएक्ट करने में लगने वाला समय

Reaction Time Test: क्या आपने कभी सोचा है कि किसी चीज पर आपका रिएक्शन कितना तेज है, इससे आपके दिमाग की सेहत के बारे में भी पता चल सकता है? दरअसल, रिएक्शन टाइम यानी किसी संकेत पर रिएक्ट करने में लगने वाला समय यह बताता है कि आपका दिमाग कितनी तेजी से जानकारी को समझता और उस पर काम करता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के रिएक्शन में धीरे-धीरे धीमी होने लगे तो यह कभी-कभी ब्रेन के काम करने की स्पीड में बदलाव का संकेत हो सकता है. साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, रिएक्शन टाइम से हल्के कॉग्नेटिव बदलाव (Mild Cognitive Impairment) के शुरुआती संकेत भी समझे जा सकते हैं. अच्छी बात यह है कि सिर्फ 30 सेकंड का एक छोटा सा टेस्ट आपको इस बारे में शुरुआती जानकारी दे सकता है.

क्या होता है रिएक्शन टाइम?

रिएक्शन टाइम वह समय होता है जो किसी संकेत मिलने और उस पर रिएक्शन देने के बीच लगता है. उदाहरण के लिए अचानक गिरती हुई चीज को पकड़ना, लाइट जलते ही बटन दबाना. इन सब कामों में दिमाग पहले संकेत को पहचानता है, फिर उसे समझता है और शरीर को प्रतिक्रिया देने का आदेश देता है. इस प्रक्रिया में दिमाग के कई हिस्से काम करते हैं, जैसे ध्यान (Attention), समन्वय (Coordination), निर्णय क्षमता (Decision Making).

उम्र बढ़ने या कुछ न्यूरोलॉजिकल बदलावों के कारण रिएक्शन टाइम थोड़ा धीमा हो सकता है. कुछ मामलों में यह याददाश्त और सोच से जुड़ी समस्याओं से भी जुड़ा पाया गया है.

30 सेकंड का रिएक्शन टाइम टेस्ट कैसे करें?

रिएक्शन टाइम मापने का सबसे आसान तरीका है रूलर ड्रॉप टेस्ट. इसे करने में एक मिनट से भी कम समय लगता है.

टेस्ट करने का तरीका:

1. किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से एक रूलर सीधा पकड़ने को कहें.
2. रूलर का 0 मार्क आपके अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच होना चाहिए.
3. आपकी उंगलियां रूलर को पकड़ने के लिए तैयार रहें, लेकिन उसे छूएं नहीं.
4. सामने वाला व्यक्ति बिना बताए रूलर छोड़ दे.
5. आपको जितनी जल्दी हो सके रूलर पकड़ना है.

रूलर जितनी कम दूरी गिरकर आपके हाथ में आएगा, आपकी प्रतिक्रिया उतनी तेज मानी जाएगी. सटीक परिणाम के लिए यह टेस्ट 4-5 बार करें और औसत निकालें.

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आपके रिजल्ट क्या संकेत दे सकते हैं?

हर व्यक्ति का रिएक्शन टाइम अलग-अलग होता है. लेकिन, अगर पहले की तुलना में प्रतिक्रिया काफी धीमी होने लगे, तो यह ब्रेन की प्रोसेसिंग स्पीड में बदलाव का संकेत हो सकता है. हालांकि इसके पीछे कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे, थकान, तनाव, नींद की कमी, ध्यान भटकना लेकिन अगर लगातार प्रतिक्रिया धीमी रहती है, तो यह कभी-कभी दिमागी कार्यक्षमता में बदलाव का संकेत भी हो सकता है.

कौन-कौन से फैक्टर रिएक्शन टाइम को प्रभावित करते हैं?

1. उम्र: उम्र बढ़ने के साथ रिएक्शन स्पीड धीरे-धीरे कम हो सकती है.

2. लाइफस्टाइल: कम नींद, ज्यादा तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है.

3. स्वास्थ्य समस्याएं: कुछ बीमारियां, दवाइयां या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी प्रतिक्रिया की गति को धीमा कर सकती हैं.

रिएक्शन स्पीड कैसे बेहतर करें? | How to Improve Reaction Speed?

कुछ आसान आदतें अपनाकर आप दिमाग की प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाए रख सकते हैं:

रेगुलर एक्सरसाइज करें: तेज चलना, योग या कोऑर्डिनेशन वाले व्यायाम दिमाग और शरीर के तालमेल को बेहतर बनाते हैं.

दिमागी एक्टिविटी करें: पजल्स, नई स्किल सीखना या मेमोरी गेम्स दिमाग को सक्रिय रखते हैं.

अच्छी नींद लें: पर्याप्त नींद दिमाग की प्रोसेसिंग स्पीड को बनाए रखने में मदद करती है.

बैलेंस डाइट लें: पोषक तत्वों से भरपूर भोजन मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है.

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर रिएक्शन टाइम लगातार धीमा हो रहा है और इसके साथ ये लक्षण भी दिखें याददाश्त कमजोर होना, बार-बार भूलना, ध्यान लगाने में परेशानी तो किसी एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर हो सकता है. शुरुआती जांच से समस्या को समय रहते समझा जा सकता है.

30 सेकंड का रिएक्शन टाइम टेस्ट आपके दिमाग की प्रोसेसिंग स्पीड का एक छोटा सा संकेत दे सकता है. यह किसी बीमारी का अंतिम डायग्नोस नहीं है, लेकिन इससे ध्यान, कॉर्डिनेशन और मेंटल स्पीड में होने वाले बदलावों का अंदाजा लगाया जा सकता है.

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