कानपुर की एक खबर चर्चा में है. यहां कलेक्ट्रेट के तीन जूनियर क्लर्क निर्धारित 25 शब्द प्रति मिनट की टाइपिंग स्पीड हासिल नहीं कर सके. जब वे इस काम में पहली बार फेल हुए तो उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई. लेकिन, दूसरी बार असफल रहने पर जिलाधिकारी के आदेश पर उन्हें क्लास IV (चपरासी) पद पर पदावनत कर दिया गया है. जानें जिलाधिकारी के पास क्या क्या पावर होती हैं.
जिलाधिकारी के पास क्या क्या पावर होती हैं
जिलाधिकारी यानी डीएम के पास कई तरह की पावर होती हैं. जैसे जिले में शांति और सुरक्षा बनाए रखना. जरूरत हो तो वह धारा 144 लागू कर सकते हैं (भीड़ या दंगे रोकने के लिए). पुलिस और प्रशासन को निर्देश देते हैं एवं आपात स्थिति में निर्णय लेते हैं.
जिलाधिकारी जिले के सभी सरकारी विभागों की निगरानी का काम भी करता है. सरकारी योजनाओं को लागू कराना, जिला स्तर पर नीति लागू करना. डीएम राजस्व से जुड़े काम जैसे जमीन, पट्टा, म्यूटेशन जैसे मामलों की देखरेख करता है. जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया हो या किसानों और जमीन से जुड़े विवादों का समाधान, सब डीएम का काम होता है.
जिलाधिकारी का काम आपदा प्रबंधन का भी होता है. जैसे अगर बाढ़ आई हो, भूकंप या आग जैसी स्थिति में राहत कार्यों का नेतृत्व करता है. राहत सामग्री का वितरण करना, बचाव कार्यों का संचालन करना इन्हीं के दायित्व में आता है. जिलाधिकारी कुछ मामलों में दंडात्मक आदेश दे सकते हैं. इसके अलावा, जिले में चुनाव करवाना भी इन्हीं का काम होता है. ये लोगों की शिकायतें सुनकर समाधान भी करते हैं. डीएम का काम बहुआयामी होता है.
कैसे बनते हैं जिलाधिकारी
जिलाधिकारी बनने के लिए उम्मीदवारों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है. IAS भारत की सर्वोच्च नागरिक सेवा है. इसके लिए UPSC का एग्जाम देना होता है.
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