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महिलाओं को कोई नौकरी पर नहीं रखेगा... मासिक धर्म की छुट्टी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कह दीं ये 5 बड़ी बातें

Menstrual Leaves Supreme Court: शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया. इस दौरान सीजेआई की मौजूदगी वाली बेंच ने इस पर कई तरह की बातें भी कहीं.

महिलाओं को कोई नौकरी पर नहीं रखेगा... मासिक धर्म की छुट्टी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कह दीं ये 5 बड़ी बातें
Menstrual Leaves Supreme Court

Menstrual Leaves Supreme Court: देशभर में काम करने वालीं महिलाओं को मासिक धर्म की छुट्टी देने की मांग वाली याचिका को सुनने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर याचिकाकर्ता से कहा कि वो सरकार के पास जाएं. इसके साथ ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने इस मामले में कई अहम टिप्पणी की हैं, जिन्हें हर महिला को जानना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स के दौरा मिलने वाली छुट्टी को लेकर कुछ चिंता भी जाहिर कीं, जिसे लेकर अब सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है. आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के इस मुद्दे पर कौन सी पांच बड़ी बातें कहीं.

  1. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने सबसे पहले ये कहा कि इस तरह की याचिकाएं महिलाओं को कमजोर या फिर कमतर दिखाने जैसा माहौल बना सकती हैं. 
  2. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इससे डर पैदा हो सकता है और ये राय बन सकती है कि मासिक धर्म महिलाओं के साथ कुछ बुरा होने जैसा है. 
  3. महिलाओं को पीरियड्स लीव देने की याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट नेक हा कि अगर इसे अनिवार्य किया गया तो कंपनियां महिलाओं को जिम्मेदारी वाले पद देने से बच सकती हैं. 
  4. जब वकील की तरफ से केरल और प्राइवेट कंपनियों के छुट्टी देने का उदाहरण दिया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनन मजबूर करने से महिलाओं के लिए न्यायपालिका या सरकारी नौकरियों के रास्ते बंद हो सकते हैं. 
  5. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नीति बनाने का निर्देश दिया और कहा कि अधिकारी इस पर विचार करें और सभी पक्षों से बात करके एक सही पॉलिसी बनाने के बारे में सोचें. 

किसने दायर की थी याचिका?

शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका दायर की गई थी. उनका तर्क है कि जब महिलाओं को मेटरनिटी लीव का प्रावधान है तो उन्हें पीरियड्स के दौरान भी छुट्टी दी जानी चाहिए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि वो सभी राज्यों को इस पर कानून बनाने का निर्देश जारी करे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा नहीं किया. 

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