- नवादा जिले के बाजितपुर गाँव के रितेश कुमार और ऋचा कुमारी ने नीट परीक्षा में एक साथ सफलता प्राप्त की है
- रितेश ने 655 अंक लेकर ऑल इंडिया रैंक 1160 और ईडब्ल्यूएस रैंक 87 हासिल किया है
- ऋचा कुमारी ने 622 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक 4685 तथा ईडब्ल्यूएस रैंक 457 अर्जित की है
Success Story: नीट रिजल्ट 2026 जारी होते ही देशभर से होनहारों की सफलता की कहानियाँ सामने आ रही हैं. इनमें सबसे प्रेरणादायी कहानी बिहार के नवादा जिले से है. यहाँ ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले एक व्यक्ति के बेटा-बेटी ने एक साथ नीट परीक्षा क्लियर की है और अब दोनों डॉक्टर बनने वाले हैं.
NEET UG 2026 में नवादा जिले के पकरीबरावां थाना क्षेत्र स्थित बाजितपुर गाँव के निवासी रितेश कुमार और उनकी बहन ऋचा कुमारी ने एक साथ सफलता हासिल कर न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन किया है. दोनों अब डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. उनकी इस सफलता से वारिसलीगंज और पकरीबरावां क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है.
रितेश ने 655 और ऋचा ने प्राप्त किए 622 अंक
रितेश कुमार ने 720 अंकों की परीक्षा में 655 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1160 और EWS रैंक 87 हासिल की है. वहीं, उनकी बहन ऋचा कुमारी ने 622 अंक प्राप्त कर AIR 4685 तथा EWS रैंक 457 अर्जित की है. एक ही परिवार के दो भाई-बहनों का एक साथ नीट जैसी कठिन परीक्षा में सफल होना पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायी उपलब्धि माना जा रहा है.
ईंट-भट्ठे पर मुंशी का काम करते पिता
रितेश और ऋचा के पिता रवि रंजन कुमार ईंट-भट्ठे पर मुंशी का कार्य करते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया. उनकी माता शोभा कुमारी गृहिणी हैं और उन्होंने बच्चों का मनोबल हमेशा ऊँचा रखा. दोनों भाई-बहन वारिसलीगंज प्रखंड के मकनपुर स्थित अपने नाना पप्पू सिंह के घर में रहकर शुरुआती पढ़ाई करते रहे. 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने वारिसलीगंज से ननिहाल में रहकर पूरी की. इसके बाद, राजस्थान के कोटा स्थित सीबीएसई मान्यता प्राप्त संस्थान में दाखिला लिया और नियमित तैयारी जारी रखी.
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
दोनों भाई-बहनों ने अपने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है. उनकी यह कहानी साबित करती है कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और परिवार के सहयोग से मिलती है. असफलता को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे सीख के रूप में अपनाकर नई ऊर्जा के साथ तैयारी की और आज सफलता का परचम लहराया.
क्षेत्र के युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
रितेश और ऋचा की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों तथा परिजनों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है. दोनों भाई-बहनों की यह सफलता आज उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं.
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