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एक पिता, तीन संतान और तीनों ही बनेंगे अफसर: सिरोही के झाड़ोली गांव के 3 सगे भाई-बहनों ने RAS एग्जाम में लहराया परचम

RPSC RAS Exam 2024 : राजस्थान के सिरोही जिले के झाड़ोली गांव के एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों ने RAS 2024 परीक्षा में सफलता हासिल कर इतिहास रच दिया है. बिना कोचिंग गांव में रहकर की तैयारी.

एक पिता, तीन संतान और तीनों ही बनेंगे अफसर: सिरोही के झाड़ोली गांव के 3 सगे भाई-बहनों ने RAS एग्जाम में लहराया परचम
यह कहानी साबित करती है कि इरादे मजबूत हों तो बिना चकाचौंध के भी सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है.

Success Story : सेकंड ग्रेड अध्यापक लालसिंह जी के घर में आज जश्न का माहौल है. उनके तीनों बच्चों महिपाल सिंह, सेजल इंदा और परमवीर सिंह ने अपनी मेहनत के दम पर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा कल जारी किए गए RAS 2024 परीक्षा में सफलता पाई है. सबसे खास बात यह है कि इन तीनों भाई-बहनों ने अपनी तैयारी के लिए किसी बड़े शहर या नामी कोचिंग में दाखिला नहीं लिया. बल्कि गांव की शांत गलियों में रहकर ही अपनी किताबों को अपना साथी बनाया और अपनी तैयारी को अंतिम रूप दिया और आज अधिकारी बनने की दहलीज पर हैं.आइए जानते हैं इन तीनों भाई बहनों ने कैसे इस कठिन एग्जाम को पास किया उनकी स्ट्रेटजी क्या थी. 

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परमवीर ने सुधारी अपनी रैंक, सेजल ने लगाया छक्का

परिवार के सबसे छोटे बेटे परमवीर सिंह ने इस परीक्षा में 24वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया है. गौरतलब है कि परमवीर ने 2023 की भर्ती में भी 66वीं रैंक पाई थी और वर्तमान में जयपुर में RPS की ट्रेनिंग ले रहे हैं. इस दूसरे प्रयास के बाद अब वे RAS (SDM) के पद पर सेवा दे सकेंगे.

वहीं, बेटी सेजल इंदा ने अपने तीसरे प्रयास में 120वीं रैंक हासिल की है. सेजल वर्तमान में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन अब उनका चयन तहसीलदार या पुलिस सेवा के उच्च पद पर हो सकता है. बड़े भाई महिपाल सिंह ने भी 931वीं रैंक लाकर इस तिहरी सफलता को पूरा किया.

मार्गदर्शन और पॉजिटिविटी का साथ

परमवीर के अनुसार, घर में शुरू से ही पढ़ाई का माहौल था. तैयारी की नींव बड़े भाई महिपाल सिंह ने रखी और उन्हीं के मार्गदर्शन में दोनों छोटे भाई-बहनों ने पढ़ाई की. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने नाना दलपत सिंह और मामा को भी दिया, जिन्होंने निराशा के क्षणों में उन्हें हमेशा सकारात्मक बनाए रखा.

यह कहानी साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों और परिवार का साथ हो, तो बिना बड़े शहरों की चकाचौंध के भी सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है.

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