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कैसे पढ़ेगा इंडिया? देश के एक लाख स्कूलों में सिर्फ एक टीचर, बिहार में 2 लाख से ज्यादा पद खाली

India Education Crisis: नीति आयोग (2024-25) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है. देश में 1 लाख से ज्यादा स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं और बिहार-झारखंड जैसे राज्यों में लाखों शिक्षक पद खाली हैं.

कैसे पढ़ेगा इंडिया? देश के एक लाख स्कूलों में सिर्फ एक टीचर, बिहार में 2 लाख से ज्यादा पद खाली
रिपोर्ट के अनुसार, 8वीं क्लास के बाद बच्चों को स्कूल में रोके रखना एक बड़ा चैलेंज बन गया है.

India Education Crisis: भारत में पढ़ाई-लिखाई यानी एजुकेशन को लेकर अक्सर बड़े-बड़े दावे सुनने को मिलते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट (2024-25) ने स्कूली शिक्षा के सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कहीं स्कूल में टीचर ही नहीं हैं, तो कहीं बेसिक सुविधाएं जैसे बिजली, पानी और टॉयलेट ही गायब हैं. सबसे बड़ी चिंता ये कि कई राज्य तो ऐसे भी हैं, जहां लाखों बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ रहे हैं. आइए जानते हैं क्या कहती है ये रिपोर्ट.

1 लाख से ज्यादा स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे

रिपोर्ट का सबसे डरावना आंकड़ा यह है कि देशभर में 1,04,125 स्कूल ऐसे हैं, जो सिर्फ एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं. सबसे खराब राज्यों में आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड का नाम है.

आंध्र प्रदेश में 12,912 स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं. यूपी में यह आंकड़ा 9,508 स्कूलों और झारखंड में 9,172 स्कूल का है. 

कई राज्यों में टीचर्स की कमी

यह समस्या यहीं नहीं खत्म होती है. टीचर्स की कमी और खाली पदों (Vacancies) की संख्या भी होश उड़ाने वाली है. अकेले बिहार में प्राइमरी लेवल पर 2,08,784 पद खाली हैं. वहीं झारखंड में भी प्राइमरी स्कूलों में 80,000 से ज्यादा शिक्षकों की कमी है. मतलब साफ है कि कई राज्यों में ऐसे स्कूल और बच्चे हैं, जिन्हें बढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं हैं.

सरकारी vs प्राइवेट: कहां कितने बच्चे स्कूल जा रहे

पिछले 10 सालों में माता-पिता का भरोसा सरकारी स्कूलों से थोड़ा डगमगाया है. आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2014-15 में सरकारी स्कूलों में एडमिशन 55.3% तक था, जो 2024-25 में घटकल 49.25% पर आ गया है. वहीं, प्राइवेट स्कूल में इसी दौरान संख्या 31.7% से बढ़कर 38.83% हो गई है. साफ है कि लोग अब प्राइवेट स्कूलों की तरफ ज्यादा रुख कर रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें मोटी फीस क्यों न चुकानी पड़े.

स्कूलों में सुविधाओं का टोटा

  • देश में करीब 1.19 लाख स्कूलों में बिजली का कनेक्शन चालू हालत में नहीं है. 
  • करीब 98,592 स्कूलों में लड़कियों के लिए फंक्शनल टॉयलेट नहीं हैं. 
  • 14,505 स्कूलों में पानी की सही व्यवस्था नहीं है.
  • करीब 59,829 स्कूलों में हाथ धोने (Handwash) की सुविधा तक नहीं है.

लाखों बच्चे छोड़ रहे स्कूल

रिपोर्ट के अनुसार, 8वीं क्लास के बाद बच्चों को स्कूल में रोके रखना एक बड़ा चैलेंज बन गया है. देशभर में सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई छोड़ने का औसत 11.5% है, लेकिन कुछ राज्यों में यह स्थिति बहुत चिंताजनक है. इसमें पहले नंबर पर पश्चिम बंगाल है, जहां हर साल करीब 20% बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं. अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक में यह आंकड़ा 18.3% तक का है, जहां बच्चे पढ़ाई बीच में ही बंद कर देते हैं.

डिजिटल गैप भी लगातार बढ़ रहा है

रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात सामने आई है. 14-16 साल के 90% लड़कों और 88% लड़कियों के घर में स्मार्टफोन पहुंच चुका है. वे फोन चलाना भी जानते हैं, लेकिन, जब बात एजुकेशन के लिए टेक्नोलॉजी के सही इस्तेमाल की आती है, तो स्कूल में न तो इंटरनेट है और न ही सिखाने वाला टीचर. ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

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