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IAS से PCS वापस जाना चाहते हैं रिंकू राही: क्या कोई अफसर खुद मांग सकता है अपना डिमोशन? जानें क्या है नियम

क्या कोई IAS अधिकारी खुद अपना डिमोशन मांग सकता है? रिंकू सिंह राही के मामले से समझें IAS से PCS वापस जाने के नियम और कानूनी नियम.

IAS से PCS वापस जाना चाहते हैं रिंकू राही: क्या कोई अफसर खुद मांग सकता है अपना डिमोशन? जानें क्या है नियम
IAS अधिकारियों के नियम और शर्तें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तय करता है.

IAS Rinku Singh Rahi News : भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का पद देश में प्रतिष्ठा और ताकत का शिखर माना जाता है. हर साल लाखों युवा इस मुकाम तक पहुंचने का सपना देखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई अफसर IAS बनने के बाद वापस राज्य सेवा (PCS) में जाने की जिद करे? यूपी कैडर के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने ऐसा ही करके सबको चौंका दिया है. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हुए गोलियां खाने वाले इस निडर अफसर के फैसले ने एक कानूनी बहस छेड़ दी है. क्या कोई IAS खुद अपना डिमोशन मांग सकता है? चलिए आइए जानते हैं क्या कहता है नियम...

क्या नियम देते हैं 'रिवर्स गियर' की इजाजत?

जवाब है, हां. एक IAS अधिकारी अपने डिमोशन की मांग कर सकता है. हालांकि, सर्विस रूल बुक में यह कोई नॉर्मल प्रोसेस नहीं है. प्रशासनिक सेवाओं में आमतौर पर लोग प्रमोशन के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन 'डिमोशन' यानी नीचे के पद पर जाने का प्रावधान स्पेशल सिचुएशन के लिए रखा गया है.

कानूनी प्रावधान और DoPT की भूमिका

IAS अधिकारियों के नियम और शर्तें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तय करता है. अगर कोई अधिकारी डिमोशन चाहता है, तो उसे कुछ खास बातों का ध्यान रखना होता है:

देना होता है ठोस कारण

केवल प्रार्थना पत्र देने से काम नहीं चलता. अधिकारी को बताना पड़ता है कि वह ऐसा क्यों चाहता है. इसमें गंभीर स्वास्थ्य कारण, पारिवारिक परिस्थितियां या व्यक्तिगत नैतिक आधार शामिल हो सकते हैं.

सरकार की मंजूरी

अधिकारी केवल अनुरोध कर सकता है, यह उसका अधिकार (Right) नहीं है. राज्य सरकार इस प्रस्ताव को केंद्र (DoPT) को भेजती है. सरकार की अंतिम मुहर के बिना पद का स्तर कम नहीं किया जा सकता.

कैडर नियमों की कठिनाई

यह प्रोसेस स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) जितनी ही जटिल है, क्योंकि इसमें पेंशन, सैलरी और वरिष्ठता (Seniority) जैसे कई तकनीकी पेंच फंसते हैं.

आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?

सरल शब्दों में कहें तो सरकार किसी को जबरदस्ती ऊंचे पद पर काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती अगर वह शारीरिक या मानसिक रूप से सक्षम महसूस नहीं कर रहा है. हालांकि, रिंकू राही का मामला अलग है, उनमें क्षमता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था को सुधारने के लिए छोटे पद पर बने रहना चाहते हैं.

बता दें प्रशासनिक इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं. आमतौर पर Deputation के दौरान अधिकारी निचले स्तर के पदों को स्वीकार करते हैं, लेकिन कैडर में वापस लौटकर डिमोशन मांगना एक अनोखा मामला है.

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