दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) अब सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी. यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए कई नई योजनाओं की जानकारी दी है. सबसे बड़ी बात ये है कि DTU अब भारतीय सेना के साथ मिलकर काम करेगी. सेना के पुराने हथियारों को नई तकनीक की मदद से पहले से बेहतर बनाया जाएगा. साथ ही साल 2027-28 से तीन नए बीटेक कोर्स भी शुरू होंगे. स्कूल के बच्चों, नौकरी करने वाले लोगों और नया काम शुरू करने की सोच रहे लोगों के लिए भी कई नई सुविधाएं शुरू की गई हैं.
सेना के साथ मिलकर होगा काम
DTU ने भारतीय सेना के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है. इसके बाद यूनिवर्सिटी के शिक्षक और छात्र सेना के पुराने हथियारों को नई तकनीक से बेहतर बनाने पर काम करेंगे. इनमें नए सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे उनकी काम करने की ताकत बढ़ेगी. इस दिशा में रिसर्च का काम भी शुरू हो रहा है.
छात्रों के लिए शुरू होंगे 3 नए BTech कोर्स
साल 2027-28 से DTU में तीन नए बीटेक कोर्स शुरू किए जाएंगे. इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैकेनिकल एंड ऑटोमेशन इंजीनियरिंग और क्वांटम टेक्नोलॉजी शामिल हैं. हर कोर्स में 60 सीटें होंगी. इन कोर्स में दाखिला जेईई मेन के नंबर के आधार पर होगा. इसके अलावा इकोनॉमिक्स में डबल मेजर का नया विकल्प भी मिलेगा, जिससे छात्र एक साथ कई नए विषय पढ़ सकेंगे.
स्कूल के बच्चों और नौकरी करने वाले लोगों के लिए भी मौका
DTU ने नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए AI, डेटा एनालिटिक्स और एंटरप्रेन्योरशिप के छह हफ्ते के सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए हैं. इन्हें पूरा करने पर छात्रों को अकादमिक क्रेडिट भी मिलेगा. वहीं नौकरी करने वाले लोगों के लिए भी AI, लीडरशिप, ESG और सस्टेनेबिलिटी जैसे विषयों में नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए गए हैं.
नई सोच और कंपनियों के साथ बढ़ेगा जुड़ाव
DTU को साइबर सुरक्षा और AI से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए पैसे मिले हैं. पिछले साल यूनिवर्सिटी ने 40 पेटेंट के लिए आवेदन किए. यूनिवर्सिटी के इनोवेशन सेंटर की मदद से 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई है. इससे कई नए काम शुरू करने वाले लोगों को मदद मिली है और हजारों लोगों के लिए काम के नए मौके बने हैं. छात्रों को बड़ी कंपनियों में ट्रेनिंग भी दी जा रही है, ताकि उन्हें पढ़ाई के साथ काम सीखने का मौका मिल सके.
गांवों और खास बच्चों के लिए भी पहल
DTU ने दिल्ली के नौ गांवों को अपनाया है. यहां मोबाइल बस के जरिए बच्चों को 3D प्रिंटर और नई तकनीक की जानकारी दी जा रही है. कुछ कोर्स में अकेली बेटी वाले परिवार की छात्राओं के लिए अलग सीटें भी रखी गई हैं. वहीं डिस्लेक्सिया और ऑटिज्म से जुड़े बच्चों को म्यूजिक थेरेपी की सुविधा भी दी जा रही है.
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