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ऑटोमेशन और हाइब्रिड वर्क कल्चर ने बिगाड़ा नए दफ्तरों का खेल, कम हो गई डिमांड

AI Impact On Real Estate: एआई के चलते काम करने के तरीके में बदलाव हुआ है, वहीं लोगों की भर्तियां भी कम हो रही हैं. ऐसे में नए दफ्तरों को रेंट पर लेने का ट्रेंड थोड़ा कम हुआ है.

ऑटोमेशन और हाइब्रिड वर्क कल्चर ने बिगाड़ा नए दफ्तरों का खेल, कम हो गई डिमांड
एआई ने बिगाड़ दिया है ऑफिस रेंट का गेम

AI Impact On Real Estate: लाखों नौकरियों के बाद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का असर दफ्तरों पर दिखने लगा है. एआई की वजह से जहां नई भर्तियों में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ ऑफिस की डिमांड भी लगातार कम होती जा रही है. बताया जा रहा है कि ऑटोमेशन और हाइब्रिड वर्क इसकी सबसे बड़ी वजह हैं. पिछले 20 सालों में जहां तेजी से बढ़ती आईटी कंपनियों और आउटसोर्सिंग सेक्टर के चलते नए ऑफिसों की डिमांड बढ़ी थी, वहीं अब ये सिलसिला थम सा गया है. आइए जानते हैं कि इसके पीछे की बड़ी वजहें क्या हैं और ये कितना खतरनाक साबित हो सकता है. 

दफ्तर की नहीं पड़ रही जरूरत

एआई भले ही नौकरियों को खत्म कर रहा हो, लेकिन दूसरी तरफ इसने बाकी चीजों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है. पहले जहां सीधा नियम था कि जितने नए इंजीनियर भर्ती होंगे, उतने ही ज्यादा डेस्क और दफ्तरों की जरूरत होगी, वहीं अब इसका ठीक उल्टा दिख रहा है. भर्ती में कमी आई है और ज्यादातर काम हाइब्रिड मोड या फिर ऑटोमेशन पर है, ऐसे में कंपनियों को दफ्तर या फिर डेस्क वाली जगह की जरूरत नहीं पड़ रही. आंकड़ों की बात करें तो पिछले 3 साल में टॉप 5 IT कंपनियों ने कुल मिलाकर 85,000 कर्मचारी कम किए हैं. इसका सीधा असर दफ्तरों की मांग पर पड़ रहा है.

एंट्री लेवल की नौकरियां कम 

रिपोर्ट्स के मुताबिक जूनियर एनालिस्ट और फ्रेशर्स की नौकरियों में 13% की गिरावट आई है. क्योंकि यही लोग सबसे ज्यादा ऑफिस आकर काम करते हैं, इसलिए जब इनकी संख्या कम होती है, तो बड़े ऑफिस कैंपस की जरूरत भी कम हो जाती है. अब कंपनियों का कहना है कि AI एक जूनियर एनालिस्ट की जगह ले सकता है.

कम स्पेस में ज्यादा काम

एक दौर था, जब बड़ी कंपनियां बड़ा स्पेस लेती थीं और वहां उसके कर्मचारी काम करते थे. वहीं आज ये दौर बदल रहा है, दफ्तर में शेयर्ड डेस्क का कल्चर बढ़ रहा है और एक ही जगह पर कई लोगों को बिठाने की व्यवस्था बन रही है. ज्यादातर दफ्तर 'हाइब्रिड मॉडल' यानी ऑफिस और घर दोनों से काम करने की पॉलिसी को अपना चुकी हैं. इसके अलावा को-वर्किंग स्पेस का मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है. 

डेटा सेंटर्स की बढ़ रही डिमांड 

भले ही पारंपरिक दफ्तरों की मांग कम हो रही हो, लेकिन 'डेटा सेंटर्स' की मांग बढ़ रही है. AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते इस्तेमाल के कारण अगले 5 साल में भारत में डेटा सेंटर्स में भारी निवेश होने की संभावना है.

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