'स्टेट मशीनरी फेल...' : बंगाल में अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार

 पश्चिम बंगाल में अधिकारियों को भीड़ द्वारा बंधक बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य की मशीनरी विफल होती है, तो हम देखेंगे कि क्या करना है.

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  • पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट संशोधन कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने बंधक बनाया था.
  • इन अधिकारियों के नाम विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से हटा दिए गए थे.
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य को चेतावनी दी है.
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पश्चिम बंगाल में सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ द्वारा बंधक बनाए जाने की चौंकाने वाली घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. शीर्ष अदालत ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है क अगर राज्य की मशीनरी विफल होती है, तो हम जानते हैं कि क्या करना है.

पिछले हफ़्ते हुई एक चौंकाने वाली घटना में- जिसमें सात न्यायिक अधिकारियों को मतदाताओं की भीड़ ने बंधक बना लिया था, जिनके नाम इस महीने होने वाले दो चरणों के विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी सूची से हटा दिए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य की मशीनरी विफल होती है, तो हम देखेंगे कि क्या करना है.

अदालत ने उस वीडियो पर भी गहरी आपत्ति जताई जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कर्मियों को धमकी देने का आरोप लगाया गया था.

चुनाव आयोग ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ने महिलाओं और लड़कियों से मतदान केंद्रों पर उपस्थित रहने का आग्रह किया था और जरूरत पड़ने पर 'आवश्यक परिस्थितियों से निपटने' के लिए रसोई के उपकरणों का उपयोग करने को कहा था.

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सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें एक महिला न्यायिक अधिकारी ने दावा किया कि उसे अपनी जान का खतरा है और उसने गुहार लगाई कि अगर उसकी हत्या कर दी जाती है तो उसके बच्चों की देखभाल की जाए.

चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा, "जनभड़काऊ कार्रवाई से माहौल और खराब होगा", जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "अगर राज्य तंत्र विफल होता है, तो हम देखेंगे..."

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बंगाल SIR मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही है. पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी और राज्य के चीफ सेक्रेटरी वर्चुअली अदालत के समक्ष पेश हुए. कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मालदा के एसपी और डीएम को भी कारण बताओ नोटिस भेजते हुए हाजिर होने को कहा था.

CJI ने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि 6 अप्रैल को दोपहर 12:04 बजे तक, कुल 60 लाख 6,000 लंबित मामलों में से न्यायिक अधिकारियों द्वारा 59 लाख 15,000 आपत्तियों का निपटारा कर दिया गया है. बताया गया है कि आज तक ही न्यायिक अधिकारियों द्वारा पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.

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