बिहार राज्यसभा चुनाव: 5 सीटों के लिए वोटिंग जारी, कांग्रेस के दो विधायक 'लापता', क्रॉस वोटिंग का डर

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान शुरू, महागठबंधन ने विपक्षी विधायकों का समर्थन जुटाया है. कांग्रेस के दो विधायकों की गैरहाजिरी से चिंता बढ़ी.

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  • बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान शुरू हो चुका है और सभी का ध्यान पांचवीं सीट पर केंद्रित है
  • महागठबंधन ने विपक्षी विधायकों का समर्थन जुटाया है, जिसमें AIMIM और बसपा के विधायक शामिल हैं
  • कांग्रेस के दो विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा और मनोज विश्वास से पार्टी नेताओं का संपर्क नहीं हो पा रहा है
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पटना:

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए मतदान शुरू हो गया है. सबकी निगाहें पांचवीं सीट पर टिकी हुई है, दोनों खेमों ने अपना पूरा दमखम लगाया है. महागठबंधन ने पूरे विपक्षी खेमे को साध लिया है. AIMIM और बहुजन समाज पार्टी के विधायक उसके समर्थन में हैं, लेकिन कांग्रेस के दो विधायकों ने महागठबंधन की चिंता बढ़ा दी है. वाल्मिकीनगर विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा, फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास से पार्टी नेताओं का संपर्क नहीं हो पा रहा है. AIMIM के भी एक विधायक पर महागठबंधन के नेताओं को संदेह है. 

कांग्रेस के 4 MLA होटल नहीं पहुंचे 

महागठबंधन ने सभी विधायकों को एक होटल में रुकने को कहा था. रविवार दोपहर से विधायक यहां इकट्ठा हो रहे हैं. बसपा के इकलौते विधायक सतीश यादव और AIMIM के विधायक भी होटल पहुंचे. हालांकि, कांग्रेस के 4 विधायक अब तक होटल नहीं पहुंचे. इनमें से दो विधायकों से कोई संपर्क नहीं हो रहा है. चनपटिया से विधायक अभिषेक रंजन और किशनगंज विधायक कमरुल होदा ही होटल पहुंचे थे. दो अन्य विधायक मनोहर प्रसाद, आबिदुर रहमान से नेताओं की बात हो रही है. लेकिन बाल्मिकीनगर विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा, फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास से पार्टी नेता संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. सुरेंद्र कुशवाहा 2015 का चुनाव उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी से लड़ चुके हैं. पिछले दिनों उनसे उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने मुलाकात भी की थी. वहीं मनोज विश्वास भी जदयू से राजद होते हुए कांग्रेस में शामिल हुए थे. इन दोनों के क्रॉस वोटिंग की आशंका है. 

एनडीए की क्‍या है रणनीति 

राज्‍यसभा चुनाव में एनडीए क्रॉस वोटिंग के साथ-साथ विपक्षी खेमे के विधायकों को एब्सेंट कराने की रणनीति पर भी काम कर रहा है. भाजपा के एक नेता ने बताया कि जो विपक्षी विधायक हमें वोट करने के लिए तैयार नहीं हैं, हमने उन्हें एब्सेंट होने के लिए मनाया है. ताकि विनिंग कोटा 41 से घट जाए और हमारे उम्मीदवार की जीत हो जाए. 

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राज्यसभा चुनाव में मौजूदा स्थिति के अनुसार एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. लेकिन अगर 4 विधायक भी एब्सेंट हो जाते हैं तो उम्मीदवार को जीत के लिए सिर्फ 40 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी. ऐसे में 40 से अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवारों के प्रथम वरीयता का 1 वोट दूसरे वरीयता का वोट पाने वाले उम्मीदवार को ट्रांसफर हो जाएगा. इस स्थिति में एनडीए के पांचों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित हो जाएगी.

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