350 रुपये की रिश्‍वत लेने के मामले में हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मी को 24 साल बाद किया बरी

अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि पुलिसकर्मी ने 350 रुपये की रिश्वत स्वीकार की थी.

विज्ञापन
Read Time: 10 mins
बॉम्‍बे HC ने कहा, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि पुलिसकर्मी ने 350 रुपये की रिश्वत ली थी
मुंबई:

भ्रष्टाचार के मामले में 24 साल पहले दोषी ठहराए जाने और एक साल की सजा पाने वाले एक पुलिसकर्मी को बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने आरोप से बरी कर दिया है.अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि पुलिसकर्मी ने 350 रुपये की रिश्वत स्वीकार की थी. महाराष्ट्र भ्रष्टाचार-निरोधक ब्यूरो ने 1988 में तत्कालीन पुलिस उप निरीक्षक दामू अव्हाड के खिलाफ 350 रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया था. अगस्त 1998 में नासिक की एक विशेष अदालत ने दामू को दोषी ठहराते हुए एक साल कैद की सजा सुनायी थी. दामू ने इसी साल उच्च न्यायालय में एक अपील दायर की थी.

न्यायमूर्ति वी जी वशिष्ठ की एकल पीठ ने बृहस्पतिवार को पारित अपने आदेश में कहा कि केवल आरोपी से पैसे की बरामदगी के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता और अभियोजन दामू के खिलाफ मामले को साबित करने में विफल रहा है. आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हुई.

अदालत ने नासिक में येओला तालुका पुलिस थाने में तैनात तत्कालीन उप निरीक्षक को बरी कर दिया. अभियोजन के अनुसार, दामू ने मार्च 1988 में एक व्यक्ति से उसके भाई को जमानत दिलाने में मदद के एवज में कथित तौर पर 350 रुपये की रिश्वत मांगी थी.

* 'महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सोमवार को बहुमत साबित करने के लिए कहा गया
* कैमरे में कैद : केरल में स्कूटर सवार ने CPM ऑफिस पर फेंका 'बम'
* निलंबित BJP नेता नूपुर शर्मा को "सारे देश से माफी मांगनी चाहिए" : सुप्रीम कोर्ट

Advertisement

उद्धव सरकार गिरते ही शरद पवार को मिला आयकर विभाग से नोटिस

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Iran War Update: US Strike On Kharg Island से Beijing में क्यों मची खलबली? Global Oil Crisis
Topics mentioned in this article