दिल्ली में रहती हूं.. कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर कर दीजिए केस.. शमी की पत्नी की SC में अपील पर नोटिस

याचिका में कहा गया है कि शमी का परिवार अमरोहा, उत्तर प्रदेश में रहता है और मामलों का दिल्ली स्थानांतरण दोनों पक्षों के लिए सुविधाजनक होगा .याचिका में यह भी दावा किया गया है कि शमी अंतरराष्ट्रीय मैचों और लीगों के लिए लगातार यात्रा करते हैं और उनके पास दिल्ली में मुकदमा लड़ने के पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं.

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मोहम्मद शमी की पत्नी फिर पहुंची सुप्रीम कोर्ट
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  • SC ने हसीन जहां की घरेलू हिंसा और भरण-पोषण मामलों को दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका पर नोटिस जारी किया है
  • 2018 में जादवपुर थाने में शमी के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम और आईपीसी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था
  • कलकत्ता HC ने शमी को हसीन जहां और उनकी बेटी को प्रति माह चार लाख रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहां की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है. ये नोटिस हसीन जहां के उन याचिकाओं को लेकर जारी किया गया है जिनमें उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत दायर मामलों को कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है. आपको बता दें कि ये आदेश जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने पारित किया है. इस याचिका के अनुसार हसीन जहां और मोहम्मद शमी का निकाह 7 अप्रैल 2014 को इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था. 

 17 जुलाई 2015 को उनकी एक बेटी का जन्म हुआ

2018 में याचिकाकर्ता ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही शुरू करते हुए आरोप लगाया कि विवाह के बाद उन्हें और उनकी नाबालिग बेटी को शमी और उनके परिजनों द्वारा गंभीर शारीरिक व मानसिक क्रूरता का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि विवश होकर दर्ज कराई गई लिखित शिकायत को प्राथमिकी माना गया, जिसके आधार पर 8 मार्च 2018 को जादवपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ. इसके अतिरिक्त, उन्होंने भरण-पोषण के लिए धारा 125 के तहत याचिका भी दायर की.अगस्त 2019 में अलीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शमी और उनके परिजनों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे.हालांकि, बाद में सत्र न्यायालय ने कार्यवाही पर रोक लगा दी, जो चार वर्षों तक जारी रही. इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने पर याचिका खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 

हाईकोर्ट ने भी पिछले साल जारी किया था आदेश

वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सत्र न्यायालय को वारंट संबंधी कार्यवाही एक महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया. पिछले वर्ष कलकत्ता हाईकोर्ट ने शमी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में याचिकाकर्ता और उनकी बेटी को प्रति माह 4 लाख रुपये देने का आदेश दिया था.इसी आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने भरण-पोषण राशि 10 लाख रुपये प्रतिमाह करने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.दिल्ली में रह रही याचिकाकर्ता ने बेटी के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए घरेलू हिंसा और भरण-पोषण से जुड़े मामलों को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है. 

याचिका में कहा गया है कि शमी का परिवार अमरोहा, उत्तर प्रदेश में रहता है और मामलों का दिल्ली स्थानांतरण दोनों पक्षों के लिए सुविधाजनक होगा .याचिका में यह भी दावा किया गया है कि शमी अंतरराष्ट्रीय मैचों और लीगों के लिए लगातार यात्रा करते हैं और उनके पास दिल्ली में मुकदमा लड़ने के पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं. जबकि याचिकाकर्ता की कोई स्वतंत्र आय नहीं है और वह नाबालिग बेटी की देखभाल व पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी वहन कर रही हैं. पश्चिम बंगाल में मुकदमे लड़ने के लिए बाध्य करना उनके लिए गंभीर कठिनाई और अन्यायपूर्ण स्थिति उत्पन्न करेगा.  

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