आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित; कोर्ट ने पक्षकारों को दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट डॉग लवर्स, कुत्तों के काटने के शिकार हुए लोगों, एनिमल राइट एक्टिविस्ट, केन्द्र और राज्य सरकारों समेत सभी पक्षकारों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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  • सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है
  • अदालत ने सभी पक्षों को एक हफ्ते में लिखित दलीलें जमा करने का आदेश दिया है ताकि निर्णय प्रक्रिया पूरी हो सके
  • इससे पहले कोर्ट ने आवारा कुत्तों को कंट्रोल करने में कमियों पर राज्यों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी
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आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है. गुरुवार को आवारा कुत्तों के मामले में पिछले आदेशों में संशोधन के अनुरोध वाली याचिकाओं पर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. 

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में डॉग लवर्स, कुत्तों के काटने के शिकार हुए लोगों, एनिमल राइट एक्टिविस्ट, केन्द्र और राज्य सरकारों समेत सभी पक्षकारों की ओर से पेश वकीलों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित किया. अदालत ने सभी पक्षों को एक हफ्ते में लिखित दलीलें जमा करने का आदेश दिया है. 

एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बंध्याकरण मामले में राज्य सरकारों द्वारा क्षमता बढ़ाने के निर्देशों का पालन न करने पर चिंता जताते हुए कहा था कि वो सभी हवाई किले बना रहे हैं. कहानी सुनाने में लगे हुए हैं. असम को छोड़कर किसी राज्य ने ये आंकड़ा नहीं दिया कि आवारा कुत्तों के काटने की कितनी घटनाएं हुईं.

इस मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल ने विभिन्न राज्यों द्वारा की गई पहलों के बारे में ब्रीफ करते हुए उनकी कमियों को उजागर किया. उनका कहना था कि कुछ राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप कदम उठाए हैं, लेकिन पूरी तरह पालन करने के लिए अब भी काफी काम बाकी है.

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उन्होंने कहा कि सरकारों को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) सुविधाओं को बढ़ाना होगा, आवारा कुत्तों के बंध्याकरण में तेजी लानी होगी, कुत्तों के शेल्टर होम स्थापित करने होंगे, संस्थागत क्षेत्रों की बाड़बंदी करनी होगी और सड़कों व राजमार्गों से आवारा जानवरों को हटाना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने असम में कुत्तों के काटने के आंकड़ों पर भी हैरानी जताई और कहा कि इन आंकड़ों को देखिए. ये चौंकाने वाले हैं. 2024 में 1.66 लाख घटनाएं हुईं और 2025 में (केवल जनवरी में ही) 20,900 घटनाएं दर्ज की गईं. ये बेहद भयावह है. कोर्ट ने अस्पष्ट बयान देने वाले राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी. 

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अदालत ने गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड और गुजरात की दलीलें भी सुनीं और स्कूलों व अस्पतालों में आवारा पशुओं को घुसने से रोकने के लिए बाड़ लगाने के निर्देशों का पालन न होने पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकारें केवल कहानी सुनाती रही हैं, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
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