मध्यस्थता केवल केस निपटाने का औजार नहीं बल्कि न्याय प्रक्रिया- जस्टिस जे के माहेश्वरी

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे के माहेश्वरी ने केस को सुलझाने में मध्यस्थता की भूमिका पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि ये एक तरह की न्याय प्रक्रिया ही है.

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जस्टिस जे के माहेश्वरी
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस जे के माहेश्वरी ने  प्राचीन काल से लेकर आज तक मध्यस्थता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सामाजिक सौहार्द और न्यायिक दक्षता का अहम माध्यम रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता को केवल मामलों की संख्या कम करने का तरीका नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि यह स्वैच्छिकता (Voluntariness) और पक्षों की सहमति (Consensus Ad idem) पर आधारित न्याय की प्रक्रिया है. उन्होंने कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यस्थता की सफलता नागरिकों की सकारात्मक भागीदारी पर निर्भर करती है.

जस्टिस माहेश्वरी दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संवाद में  रेज़ॉल्विफाई ग्लोबल मेडिएशन कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे. यह सम्मेलन DY स्पीकर हॉल, कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित हुआ, जहां भारत में बढ़ती न्यायिक लंबित मामलों  की समस्या और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR), विशेष रूप से मध्यस्थता की भूमिका पर गहन चर्चा हुई. समारोह में देश-विदेश के वरिष्ठ न्यायाधीशों, वकीलों और मध्यस्थता विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.

सम्मेलन का उद्देश्य भारत की न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता (Mediation) को प्राथमिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में स्थापित करना रहा. इस सम्मेलन का आयोजन रेज़ॉल्विफ़ाई के संस्थापक एवं निदेशक चिराग मित्तल, एडवोकेट दिव्या प्रभा सिंह और एडवोकेट साक्षी रमन द्वारा, एडवोकेट ओंकार सिंह के मार्गदर्शन में किया गया.

सम्मेलन के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जितेंद्र कुमार महेश्वरी रहे, जबकि जस्टिस विनीत सरन (सेवानिवृत्त) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे. इसके अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता विशेषज्ञ स्टुअर्ट हैनसन ने भी विचार रखे. सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि मध्यस्थता से न्याय तेज, सस्ता और आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सकता है. 

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