- अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से स्टेट ऑफ होर्मूज से ओमान की खाड़ी तक स्थिति गंभीर हो गई है.
- नौसेना ने तेल और गैस की सुरक्षित आपूर्ति के लिए होर्मूज से ओमान की खाड़ी तक युद्धपोतों की तैनाती बढ़ाई है.
- नौसेना के युद्धपोत 2019 से इस क्षेत्र में मिशन आधारित तैनाती कर रहे हैं. अब उनकी संख्या 6 से 8 तक बढ़ाई गई है.
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात अब इतने गंभीर हो चुके हैं कि टकराव का दायरा स्टेट ऑफ होर्मूज से आगे बढ़कर ओमान की खाड़ी तक फैल गया है. बदलते भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए भारतीय नौसेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है. तेल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे, इसके लिए नौसेना ने स्टेट ऑफ होर्मूज से लेकर ओमान की खाड़ी तक अपने युद्धपोतों की तैनाती को और मजबूत कर दिया है. हालांकि, भारतीय युद्धपोत इस क्षेत्र में पहले से ही लगातार पेट्रोलिंग करते रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए निगरानी और सुरक्षा उपायों को और तेज कर दिया गया है.
स्टेट ऑफ होर्मूज में संकट बढ़ने के बाद इस इलाके में नौसेना के तीन युद्धपोत की मौजूदगी देखी गई, जो होर्मूज के बाद भारतीय झंडा वाले जहाजों को आगे तक सुरक्षित जाने में एस्कार्ट करते थे. अब एनडीटीवी को जानकारी मिली है कि अब इस इलाके नौसेना के कम से 6 से 8 युद्धपोत मौजूद है, जो यह सुनिश्चित कर रहे है कि भारतीय तेल टैंकर और कार्गो जहाज पर कोई हमला न हो.
इसकी बड़ी वजह है कि भारत किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नही हैं. इस जंग में वह न तो अमेरिका और इजरायल के साथ खड़ा दिखना चाहता है और न ही ईरान की तरफ. ऐसे में भारत की कोशिश है कि उसके एलपीजी और क्रूड ऑयल खाड़ी देशों से होकर सुरक्षित आ जाए. इसके लिए वह युद्धपोत के साथ-साथ ड्रोन और निगरानी विमान का भी इस्तेमाल कर रहा है. ताकि आने वाले खतरे को टाला जा सके. इस इलाके में अतिरिक्त युद्धपोतों की तैनाती भी एहतियात के तौर पर उठाया गया कदम है.
सूत्रों की मानें तो पहले यहां 3 युद्धपोत तैनात थे. वहीं, अब उनकी तादाद बढ़ाकर 6 से 8 कर दी गई है. इसमें डिस्ट्रायर से लेकर फ्रिगेट भी शामिल है. इन युद्धपोतों को अपने रडार, सैटेलाइट और अन्य निगरानी सिस्टम से लगातार जानकारी मिलती रहती है. ये युद्धपोत हर तरह के हथियार से लैस है. ब्रह्मोस से लेकर बराक मिसाइल के अलावा ये टारपीडो और गन के साथ 24 घंटे तैनात रहते है. ये होर्मूज के बाहर से उत्तर पश्चिम अरब सागर के खतरनाक इलाकों में जहाजों को एस्कार्ट कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. एक और बड़ी वजह यह भी है कि नौसेना अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिये अकेले ऑपरेशन चला रही है. इस वजह से वह कोई रिस्क लेने के मूड में नही है.
हालांकि, नौसेना के सूत्रों का यह भी कहना है कि नौसेना के युद्धपोतों की इस इलाके में तैनाती 2019 से ही है. नौसेना अपने युद्धपोतों की मिशन बेस्ड तैनाती करती रहती है. नौसेना ने एंटी पायरेसी के खिलाफ रेड सी में भी अपने युद्धपोत 2018 से ही तैनात कर रखे है. वहीं, ओमान की खाड़ी में भी भारत ने 2019 से ही अपने युद्धपोत तैनात किए है, जो इलाके में भारतीय व्यापारिक जहाजों की निगरानी और सुरक्षा में लगे है. पहले भी ऑपरेशन संकल्प के तहत 14 दिसंबर 2023 से 23 मार्च तक समुद्री सुरक्षा अभियान के तहत अदन की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक ऑपरेशन चलाया था. एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक होर्मूज स्टेट के पूरब में ओमान की खाड़ी के पास नौसेना के ज्यादा युद्धपोतों की तैनाती है. नौसेना की निगरानी में अब तक तीन भारतीय जहाज आ चुके है पर अभी भी करीब दो दर्जन जहाज फंसे हुए है.
20 दिन से जारी इस जंग में भारत के जहां इजरायल से सामरिक तौर पर मजबूत रिश्ते है वही ईरान के साथ भी पुराने रणनीतिक संबंध हैं. भारत किसी के साथ रिश्ते दांव पर लगाना नहीं चाहता है. यही वजह है कि ईरान और इजरायल दोनों भारत को अपना दोस्त बताते है.
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