डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के रिटायर जजों की पेंशन को लेकर SC चिंतित, केंद्र को समाधान निकालने को कहा

पिछली सुनवाई 11 जुलाई को हुई थी जिसमें कोर्ट ने कई राज्यों के वित्त सचिवों को तलब किया था क्योंकि उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सेकेंड नेशनल जुडिशल पे कमीशन की सिफारिशों पर अमल नहीं किया था.

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नई दिल्ली:

जिला अदालतों के जजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता. रिटायर जजों की पेंशन बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कहा कि  सुप्रीम कोर्ट जिला अदालतों का संरक्षक है. ⁠इसलिए हमें इन अदालतों के जजों की मदद करनी चाहिए  इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से रास्ता निकालने को कहा है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पीठ ने अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल को इस मुद्दे पर एमिक्स क्यूरी नियुक्त किए गए के. परमेश्वर के साथ बैठकर समाधान निकालने को कहा है.

जिला जजों की पेंशन 15 हजार रुपये है

इस मामले में याचिकाकर्ता ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन के साथ एक रिटायर्ड जिला जज भी हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. जिला अदालतों के रिटायर्ड जजों को 15 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है. जिला जज हाईकोर्ट जज के रूप में प्रोन्नत होने पर 30 हजार रुपए मासिक पेंशन पाने के हकदार होते हैं. कुछ जिला जज 55 से 57 साल की उम्र तक ही हाईकोर्ट में प्रोन्नत हो पाते हैं. 

सरकार ने समय मांगा

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के रिटायर जजों में से बहुत कम को आर्बिटेशन के मुकदमे मिलते हैं. हाईकोर्ट से 62 साल की उम्र में रिटायर होने के बाद कुछ ही जज सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने जा पाते हैं. पीठ के इस विचार पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस गंभीर मुद्दे पर दलील रखने से पहले सरकार के साथ विचार विमर्श के लिए कुछ समय मांगा.

कोर्ट ने उनकी बात मानते हुए 27 अगस्त को ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन की इस याचिका पर सुनवाई करने की बात कही. सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर ने कोर्ट को बताया कि कई राज्य जिला अदालतों के रिटायर्ड जजों के लिए सेकेंड नेशनल जुडिशल पे कमीशन की सिफारिशों के अनुसार ही पेंशन और पिछले बकाए यानी अन्य भत्तों सुविधाओं का भुगतान करते हैं.

पिछली सुनवाई 11 जुलाई को हुई थी जिसमें कोर्ट ने कई राज्यों के वित्त सचिवों को तलब किया था क्योंकि उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सेकेंड नेशनल जुडिशल पे कमीशन की सिफारिशों पर अमल नहीं किया था.

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