बाराबंकी में सरयू नदी उफनाई, कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, महिलाओं ने नाव पर बनाया खाना

सरयू नदी (Saryu River) खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. सरयू में ई बाढ़ कई दिनों से हो रही बारिश और नेपाल (Nepal) से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी की वजह से है. बाढ़ (Flooding) में चलते सैकड़ों गांव प्रभावित हुये हैं.

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नई दिल्ली:

बाराबंकी (Barabanki) जिले में सरयू नदी(Saryu River) उफान पर है. कई गांवों में बाढ़ (Flooding) का पानी भर गया है, लिहाजा लोगों को गर थोड़ना पड़ा है. खाने पीने का सामान जुटाने में खासी दिक्कत हो रही है. हालात यह है कि कहीं पानी के बीच ऊंचे स्थान पर तखत लगाकर खाना बनाया जा रहा है तो कहीं महिलाएं नाव पर चूल्हा जलाने को मजबूर हैं. सिरौलीगौसपुर तहसील के तिलवारी गांव में महिलाओं को नाव में ही कखाना बनाना पड़ा क्योंकि सरयू नदी का पानी इस कदर बढ़ा कि लोग अपना घर-वार छोड़कर नाव में सवार हो गये हैं. प्रशासन मदद के भले ही लाख दावे कर लेकिन तस्वीरें प्रशासन के दोवों की पोल खोलती नजर आ रही हैं. लोग बच्चों का पेट पालने के लिए नाव पर ही खाना बनाने को मजबूर है.

सरयू नदी में आई बाढ़ पिछले कई दिनों से हो रही बारिश और नेपाल से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी की वजह से है. बाढ़ में चलते जिले की तीन तहसील रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के सैकड़ों गाव प्रभावित हुये हैं. सैकड़ों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है.बाराबंकी के जिला अधिकारी अविनाश कुमार क्षेत्र का मौका मुआयना करने पहुंचे और कहा कि राज्य मंत्री के साथ अभी दौरा किया है सभी लोगों को उचित सुविधा मुहैया कराई जाएगी.

खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा नदी 
बाराबंकी जिले में घाघरा नदी  खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.  रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के सेमरी गांव के ग्रामीण बांस बल्ली का पुल बनाकर जान जोखिम में डालकर नदी को पार कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटा होने के चलते कई बार जनप्रतिनिधियों से कहा, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है.

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