- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आज उद्घाटन होगा और अप्रैल से मई के बीच घरेलू उड़ानें शुरू होंगी.
- एयरपोर्ट से शुरूआती उड़ानों में इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस प्रमुख एयरलाइंस होंगी.
- एयरपोर्ट में आधुनिक डिजिटल चेकइन, लंबा रनवे, ILS सिस्टम और बायोमेट्रिक बोर्डिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं
देश के सबसे बहुप्रतीक्षित विमानन प्रोजेक्ट्स में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का आज औपचारिक उद्घाटन होने जा रहा है. उद्घाटन के साथ ही दिल्ली‑एनसीआर, पश्चिमी यूपी और आसपास के इलाकों को एक आधुनिक, हाई‑टेक और भविष्य‑उन्मुख हवाई अड्डे की सौगात मिलेगी.
कब से शुरू होंगी उड़ानें
उद्घाटन के बाद व्यावसायिक उड़ानें अगले कुछ हफ्तों में, यानी अप्रैल के मध्य से मई के बीच शुरू होने की उम्मीद है. पहले चरण में घरेलू उड़ानों पर फोकस रहेगा.
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शुरुआती चरण में ये एयरलाइंस
एयरपोर्ट के लॉन्च के समय जिन एयरलाइंस के संचालन शुरू करने की संभावना है, उनमें इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस शामिल हैं.
पहले चरण में संभावित रूट
शुरुआत में बड़े मेट्रो शहरों को जोड़ा जाएगा. मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के लिए फ्लाइट्स चलेंगी. इसके बाद घरेलू नेटवर्क का विस्तार कई शहरों तक होने की संभावना है. इनमें चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, गोवा, लखनऊ जैसे शहर होंगे.
अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कब?
2026 में चरणबद्ध तरीके से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू की जानी हैं. माना जा रहा है कि शुरुआत में दुबई, सिंगापुर, ज्यूरिख के लिए फ्लाइट्स शुरू होंगी.
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उड़ानों की क्षमता
लॉन्च के समय इस एयरपोर्ट से प्रतिदिन 100 से 150 उड़ानें संचालित करने की योजना है. मांग बढ़ने के साथ-साथ उड़ानों की संख्या में लगातार इजाफा किया जाएगा, जिससे भविष्य में यह एयरपोर्ट ज्यादा बड़ी क्षमता के साथ काम कर सकेगा.
डिजिटल चेकइन की सुविधा
लंबा रनवे, बड़े विमान
यहां करीब 3900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो बड़े और भारी विमानों को आसानी से हैंडल करने में सक्षम है. इस रनवे की बदौलत लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय वाइड-बॉडी फ्लाइट्स को भी सुविधाजनक तरीके से संचालित किया जा सकेगा.
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ऑल‑वेदर ऑपरेशन
यह एयरपोर्ट ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) से लैस है. उत्तर भारत के कोहरे में भी सुरक्षित संचालन की सुविधा इस एयरपोर्ट पर है.
डिजिटल और टचलेस सफर
डिजीयात्रा बायोमेट्रिक बोर्डिंग, सेल्फ चेक‑इन और ऑटोमेटेड बैग ड्रॉप और स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों को अनुभव यहां यात्री कर पाएंगे.
ग्रीन और सस्टेनेबल एयरपोर्ट
इस एयरपोर्ट पर नेट‑ज़ीरो एमिशन का लक्ष्य रखा गया है. सोलर एनर्जी और वॉटर रीसाइक्लिंग सिस्टम भी यहां मौजूद रहेगा.
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कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब
- अलग कार्गो टर्मिनल
- प्रस्तावित MRO (मेंटेनेन्स, रिपेयर, ओवरहॉल) सुविधा
- मल्टी‑मॉडल फ्रेट कनेक्टिविटी
कनेक्टिविटी की मजबूत रीढ़
यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क रखता है तथा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी अच्छी तरह लिंक किया गया है. भविष्य में यहां मेट्रो और रेल कनेक्टिविटी भी विकसित की जाएगी, जिससे यह क्षेत्र बेहद सुलभ और सुविधाजनक बन जाएगा.
सुरक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर
सुरक्षा के उच्चतम मानकों को ध्यान में रखते हुए यहां कैटेगरी-9 फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित किया गया है. साथ ही अत्याधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम और उच्च क्षमता वाला एयरक्राफ्ट पार्किंग एरिया उपलब्ध है, जो सुरक्षित और कुशल संचालन सुनिश्चित करता है.
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टर्मिनल का अनुभव
विशाल और आधुनिक टर्मिनल बिल्डिंग यात्रियों को बेहतरीन अनुभव प्रदान करती है. इसमें रिटेल आउटलेट्स, आरामदायक लाउंज और हाई-कैपेसिटी डिजाइन शामिल है, जो यात्रियों की सुविधा और सुगमता को प्राथमिकता देता है.
कुल मिलाकर, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक, औद्योगिक और वैश्विक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है.














