- झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिनमें से एक पर कांग्रेस ने प्रणव झा उम्मीदवार बनाया है
- झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिसमें झामुमो के 34 विधायक शामिल हैं
- JMM और कांग्रेस के बीच राज्यसभा उम्मीदवार चयन को लेकर मतभेद दिखाई दे रहे हैं, जो गठबंधन में तनाव बढ़ा सकता है
झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए सरगर्मी तेज हो गई है. प्रदेश में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं. ये सीट झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन होने और भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल खत्म होने से खाली हुई है. इन दोनों सीटों में से एक सीट कांग्रेस ने लिया है. कांग्रेस ने इस सीट पर प्रणव झा को अपना उम्मीदवार बनाया है. एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा, लेकिन दूसरी सीट पर कांग्रेस को महागठबंधन के सभी सहयोगियों का वोट चाहिए होगा.
झारखंड विधानसभा का गणित कुछ इस प्रकार है - विधानसभा में कुल 81 सीट है, जिसमें सत्ताधारी महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं. इसमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और सीपीएम माले के 2 विधायक हैं.
दूसरी तरफ एनडीए के पास 24 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 21 विधायक और आजसू, जेडीयू और एलजेपी(चिराग) के पास एक-एक एमएलए है, जबकि अन्य के रूप में जेएलकेएम के पास एक विधायक है. हालांकि अभी यह नहीं पता कि जयराम महतो किसको वोट करेंगे. इस लिहाज से बीजेपी के पास राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 4 विधायक कम हैं.
झारखंड में अभी तक झामुमो और बीजेपी ने अपना उम्मीदवार नहीं दिया है, लेकिन रांची में कुछ नेताओं से बात करने पर यह पता चलता है कि हेमंत सोरेन अपनी पार्टी की तरफ से अपनी बड़ी बहन अंजनी सोरेन को उम्मीदवार बना सकते हैं.
इधर कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने कहा है कि “हम झारखंड सहित सभी सातों सीट जीतने जा रहे है.”
सुप्रियो भट्टाचार्जी
जाहिर है झामुमो प्रवक्ता के बयान से यह साफ जाहिर है कि कांग्रेस और झामुमो के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और कांग्रेस आलाकमान को जल्द ही इस बारे में डैमेज कंट्रोल करना चाहिए, वरना कांग्रेस की यह सीट फंस सकती है.
दूसरी तरफ बीजेपी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. रांची में ये भी चर्चा जोरों पर है कि बीजेपी एक बड़े औद्योगिक घराने के एक प्रतिनिधि को अपना सर्मथन दे सकती है. ये शख्स अभी भी राज्यसभा के सदस्य हैं और पिछली बार आंध्र प्रदेश से जीतकर आए थे. ये एक बार झारखंड से भी राज्यसभा में जा चुके हैं. वैसे बीजेपी से एक प्रवक्ता के नाम की भी चर्चा है, जो दो साल पहले कांग्रेस से बीजेपी में चले गए थे. इनका जमशेदपुर के एक बड़े शिक्षण संस्थान से भी नाता रहा है.
इस लिहाज से झारखंड में राज्यसभा के दो सीटों के लिए कांग्रेस ने सबसे पहले अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा करके चुनाव को रोचक और पेचीदा बना दिया है. हालांकि यहां उनके लिए चुनौती बड़ी होती जा रही है.
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