बाबरी मस्जिद ढहाए जाने को 'शौर्य दिवस' के रूप में मनाने पर राजस्थान सरकार ने लिया यू-टर्न

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शौर्य दिवस मनाने का निर्णय वापस लिया गया है. क्योंकि यह विवाद इस समय भाजपा के लिए ठीक नहीं माना जा रहा, खासकर आगे होने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों को देखते हुए.

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सरकार ने अचानक इस विषय पर यू-टर्न लिया और शौर्य दिवस को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स को बेबुनियाद बताया.
जयपुर:

राजस्थान सरकार ने 6 दिसंबर को 'बाबरी ढांचे के ध्वंस दिवस' को शौर्य दिवस के रूप में मनाने के फैसले पर अचानक से यू-टर्न ले लिया. राजस्थान सरकार ने अपना ही आदेश वापस लेते हुए इसे 'भ्रमक' बताया है. इस मामले पर राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने NDTV से विशेष बातचीत की और कहा “हम इसे बाबरी का ध्वंस नहीं कहेंगे. वहां मूल रूप से राम मंदिर था, जिसे 500 साल पहले बाबर ने तोड़ा था. मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए आंदोलन चला, 3 लाख लोगों ने बलिदान दिया, कई कारसेवकों को गोलियां झेलनी पड़ीं. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि यह रामजन्मभूमि है और यहां राम मंदिर बनना चाहिए. इससे पहले 6 दिसंबर को कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिराया, यह एक साहसिक कार्य था और हम इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाएंगे.”

क्या है पूरा मामला

दरअसल 22, अक्टूबर, 2025 की तारीख वाले एक सरकारी पत्र में सभी सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश दिया गया था कि वे 'बाबरी ढांचे के ध्वंस दिवस' को शौर्य दिवस के रूप में मनाएं. इसके लिए भाषण, निबंध लेखन जैसे कार्यक्रम रखें. जिनके विषय थे 'भारतीय मंदिर संस्कृति और राम आंदोलन की महिमा', 'बहादुरी और त्याग की परंपरा', 'राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका'.

सर्कुलर के अनुसार, सरकारी और निजी स्कूलों में देशभक्ति गीत, नाटक प्रस्तुतियां, तथा राम मंदिर निर्माण से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित की जानी थी. यह आदेश बीकानेर के माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी किया गया था. सर्कुलर में छात्रों से एक शपथ दिलवाने की भी बात कही गई थी. देश की एकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने की तथा अयोध्या के राम मंदिर को सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय गौरव की पुनर्स्थापना का प्रतीक मानने की. इसके साथ ही राम भजन, स्तुति, तथा सूर्य नमस्कार और योग जैसी प्रेरणादायी गतिविधियों का आयोजन भी प्रस्तावित था. 

"शौर्य दिवस मनाने की खबरें गलत"

लेकिन सरकार ने अचानक इस विषय पर यू-टर्न लिया और शौर्य दिवस को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स को बेबुनियाद बताया. 30 नवंबर 2025 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जल्दबाज़ी में जारी आदेश में कहा गया कि 6 दिसंबर को शौर्य दिवस मनाने की खबरें गलत और भ्रामक हैं. शिक्षा विभाग ने ऐसे किसी कार्यक्रम को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है, और पहले वायरल हुई चिट्ठी भी झूठी है.

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सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शौर्य दिवस मनाने का निर्णय वापस लिया गया है. क्योंकि यह विवाद इस समय भाजपा के लिए ठीक नहीं माना जा रहा, खासकर आगे होने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों को देखते हुए.

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मामले में भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, “शिक्षा विभाग अपने ही मंत्री और अपने ही आदेश का मज़ाक बना रहा है. शिक्षा मंत्री को बताना चाहिए कि आखिर चल क्या रहा है. ये लोग यू-टर्न लेने और ऊपर से डांट पड़ने पर आदेश वापस लेने के लिए ही जाने जाते हैं.”

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