'जेन जी' आंदोलन में नेपाल से भागे कैदियों का भारत में आतंक, सीतामढ़ी के डकैती कांडों से जुड़े तार

सीतामढ़ी पुलिस ने अब आधिकारिक रूप से नेपाल प्रशासन से फरार कैदियों की सूची और उनका आपराधिक इतिहास साझा करने का अनुरोध किया है ताकि पहचान सुनिश्चित की जा सके.

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  • नेपाल में जेन जी आंदोलन के दौरान जलेश्वर और गौर जेल से 800 से अधिक कैदी फरार हुए थे.
  • सीतामढ़ी में नेपाल के फरार अपराधी भारतीय सीमा में घुसकर परिहार और कन्हौली डकैती कांडों में सक्रिय पाए गए हैं.
  • सीसीटीवी फुटेज और खुफिया इनपुट से पुष्टि हुई है कि नेपाल के अपराधी भारतीय क्षेत्र में अपराध कर रहे हैं.
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नेपाल में 'जेन जी' आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा और जेल तोड़कर भागे सैकड़ों कैदियों की भारतीय सीमा में सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. बिहार के सीतामढ़ी जिले से सटे नेपाल के जलेश्वर और गौर जेल से फरार अपराधियों के तार हाल ही में हुए परिहार और कन्हौली डकैती कांडों से जुड़ते नजर आ रहे हैं. एसआईटी के नेतृत्वकर्ता एएसपी आशीष आनंद के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और खुफिया इनपुट इस बात की पुष्टि करते हैं कि नेपाल के फरार अपराधी भारतीय क्षेत्र में घुसकर भीषण वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. इस खुलासे के बाद से सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल व्याप्त है.

आंकड़ों के अनुसार, 8 सितंबर 2025 को नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान जलेश्वर जेल से 576 और गौर जेल से 264 कैदी फरार हो गए थे. कुल 800 से अधिक फरार अपराधियों में से लगभग 300 अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और माना जा रहा है कि इनमें से कई ने भारतीय सीमा में शरण ली है. जांच के दौरान नेपाल के सर्लाही जिला स्थित पोशुआ पुनर्वास गांव के संदिग्धों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है. सीतामढ़ी पुलिस ने अब आधिकारिक रूप से नेपाल प्रशासन से फरार कैदियों की सूची और उनका आपराधिक इतिहास साझा करने का अनुरोध किया है ताकि पहचान सुनिश्चित की जा सके.

भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी (SSB) और स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं. बैरगनिया, भिट्ठा, सुरसंड और परिहार जैसे संवेदनशील इलाकों में विशेष गश्त बढ़ा दी गई है. सीमा पार से होने वाली डकैती, शराब तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए हाई अलर्ट घोषित किया गया है. कन्हौली में व्यवसायी रामाशंकर प्रसाद के घर हुई बमबाजी और डकैती जैसी घटनाओं ने पुलिस को मजबूर किया है कि वे सीमाई इलाकों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय स्थापित करें.

रंजीत कुमार की रिपोर्ट

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