कलाम ने 20 साल पहले पहचान ली थी 'कमजोर नस', अब खाड़ी युद्ध ने खोल दी ऊर्जा निर्भरता की पोल

2005 और 2006 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने एक साहसिक राष्ट्रीय मिशन की रूपरेखा पेश की थी. उनका लक्ष्य था- 2020 तक ऊर्जा सुरक्षा और 2030 तक पूर्ण ऊर्जा स्वतंत्रता हासिल करना.

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  • डॉ. अब्दुल कलाम ने 20 साल पहले ही 2020 तक ऊर्जा सुरक्षा और 2030 तक पूर्ण ऊर्जा स्वतंत्रता का विजन दिया था
  • भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा में महत्वपूर्ण तरक्की की है और गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 51.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है
  • कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस के लिए भारत अब भी खाड़ी देशों पर निर्भर है. मौजूदा संकट ने इसके खतरे उजागर कर दिए हैं
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पश्चिम एशिया के सुलगते हालात और खाड़ी में जारी संघर्ष ने भारत की उस कमजोर नस को उजागर कर दिया है, जिसे 'मिसाइल-मैन' डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 20 साल पहले ही पहचान लिया था. राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने दो दशक पहले ऊर्जा के मामले में भारत को स्वतंत्र बनाने का जो बड़ा सपना देखा था, वह आज भी अधूरा है और भारत अब भी खाड़ी देशों के रहमोकरम पर निर्भर है.  

2020 तक ऊर्जा सुरक्षा, 2030 तक पूर्ण ऊर्जा स्वतंत्रता

2005 और 2006 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने एक साहसिक राष्ट्रीय मिशन की रूपरेखा पेश की थी. उनका लक्ष्य था- 2020 तक ऊर्जा सुरक्षा और 2030 तक पूर्ण ऊर्जा स्वतंत्रता हासिल करना. उन्होंने साफ कहा था, "ऊर्जा स्वतंत्रता ही किसी राष्ट्र की जीवनरेखा होती है."  2006 में नई दिल्ली में रिन्यूएबल एनर्जी पर साउथ एशियन कॉन्फ्रेंस में कलाम ने कहा था कि जीवाश्म आधारित तेल, कोयला और गैस हमेशा नहीं चल पाएंगे. तेल इतना महंगा हो जाएगा कि भारत को रास्ता निकालना ही होगा. 

ऊर्जा स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना होगा

उन्होंने 2005 में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता का खाका पेश किया था. उन्होंने कहा था कि ऊर्जा स्वतंत्रता को देश की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना होगा. हमारा लक्ष्य 2020 तक ऊर्जा सुरक्षा और 2030 तक ऊर्जा स्वतंत्रता हासिल करने का होना चाहिए. 

अब जब अमेरिका-इजरायल के हमलों और खाड़ी देशों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई लगभग ठप है, तब भारत को कलाम की वह चेतावनी शिद्दत से याद आ रही है. खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का मतलब होगा- भारत की रसोई का बजट बिगड़ना, उद्योगों की लागत बढ़ना और बेतहाशा महंगाई.

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क्या था कलाम का एनर्जी प्लान?

  • डॉ. कलाम ने केवल एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा के कई रास्तों का मिश्रण तैयार करने का विजन पेश किया था. नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर उन्होंने कहा था कि कुल बिजली उत्पादन में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी 5% से बढ़ाकर 25% करनी होगी. भारत ने इस दिशा में शानदार काम किया है. नवंबर 2025 तक भारत की गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 262.74 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो कुल क्षमता का लगभग 51.5% है.
  • डॉ. कलाम ने उस वक्त अनुमान लगाया था कि भारत के विकास के साथ कदमताल करने के लिए ऊर्जा उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ानी होगी. उन्होंने उस वक्त की 1.3 लाख मेगावाट क्षमता को 4 लाख मेगावाट तक पहुंचाने की बात कही थी. ये भी कहा था कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को हाइडल प्रोजेक्टों पर निर्भर रहने के बजाय नदियों को जोड़ने, परमाणु क्षमता तैयार करने और बड़े पैमाने पर सोलर फार्म तैयार करने होंगे.
  • राष्ट्रपति कलाम ने साल 2030 तक परमाणु क्षमता को बढ़ाकर 50,000 मेगावाट तक ले जाने का विजन रखा था. इतना ही नहीं, कार्बन नैनोट्यूब (CNT) बेस्ड फोटोवोल्टिक सेल्स जैसी अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सौर ऊर्जा को सस्ता और सुलभ बनाने पर ज़ोर दिया था.

तेल पर निर्भर भारत, युद्ध ने दिखाया आईना 

बिजली उत्पादन, रिन्यूएबल इन्फ्रास्ट्रक्चर और सोलर पावर में भारत ने भले ही झंडे गाड़ दिए हों, लेकिन लिक्विड फ्यूल और गैस अब तक भूराजनैतिक संकट के साये से उबर नहीं पाए हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल और लगभग आधी नेचुरल गैस अब भी आयात करता है. इसके लिए वह खाड़ी देशों के उसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर है, जहां इस वक्त ईरान ने नाकाबंदी कर रखी है. 

बिजली उत्पादन में ऊंची छलांग

बिजली उत्पादन के मामले में भारत ने ऊंची छलांग लगाई है. ऑफिशियल आंकड़े बताते हैं कि इस वक्त भारत की इंस्टॉल्ड इलेक्ट्रिसिटी कैपेसिटी लगभग 520 गीगावाट हो चुकी है. लेकिन जिस क्षेत्र में भारत ने कलाम के विजन को साकार कर दिखाया है, वो है सौर ऊर्जा. 28 फरवरी तक के सरकारी आंकड़ों में बताया गया है कि भारत की सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता लगभग 143.60 गीगावाट हो चुकी है. इसमें 109.50 गीगावाट ग्राउंड प्रोजेक्ट और 24.86 गीगावाट रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट से आती है. 

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2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य

भले ही हम कलाम की 2020 तक ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने की डेडलाइन से चूक गए हों, लेकिन भारत अब एक बड़ी संरचनात्मक सुधार की तरफ बढ़ रहा है. सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी (SHANTI) एक्ट, 2025 इसी दिशा में एक बड़ा कदम है. इसका लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करना है, ताकि विदेशी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को जड़ से खत्म किया जा सके.

एक अधूरा सपना, जो सबक बन गया

डॉ. कलाम के दो दशक पहले के भाषण आज किसी भविष्यवाणी की तरह लगते हैं. उन्होंने ऊर्जा को संप्रभुता का सवाल माना था. देश की 520 गीगावाट की कुल स्थापित बिजली क्षमता और 143.6 गीगावाट की सौर क्षमता साबित करती है कि भारत जब मिशन मोड में आता है तो बड़े बदलाव मुमकिन हैं. लेकिन खाड़ी युद्ध का सबक साफ है- ऊर्जा सुरक्षा केवल इच्छाशक्ति से नहीं आती, इसे तकनीक और कूटनीति के जरिए तैयार करना करना पड़ता है. ऐसे में ऊर्जा स्वतंत्रता को देश की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना ही होगा ताकि भविष्य में कोई भी बाहरी युद्ध भारत की प्रगति का पहिया न रोक पाए.

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