"महत्वपूर्ण मील का पत्थर, ऐतिहासिक उपलब्धि...": उल्फा के साथ शांति समझौते पर पीएम मोदी

उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने शुक्रवार को केंद्र और असम सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें हिंसा छोड़ने, सभी हथियार सौंपने, संगठन को खत्म करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की गई.

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उल्फा के साथ शांति समझौते से असम में स्थायी प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा: प्रधानमंत्री मोदी
नई दिल्‍ली:

अल्‍फा (ULFA) समूह के साथ हुआ ऐतिहासिक समझौता कई मायनों में खास है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार को केंद्र और असम सरकार (Asam Government) द्वारा उल्फा के साथ किये गये शांति समझौते (Peace Pact) की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता राज्य में स्थायी प्रगति का मार्ग बनाएगा. इसकी काफी समय से कोशिश हो रही थी, आखिरकार इस पर सहमति बन गई है. 

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति

उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने शुक्रवार को केंद्र और असम सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें हिंसा छोड़ने, सभी हथियार सौंपने, संगठन को खत्म करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की गई. राष्ट्रीय राजधानी में समझौते पर हस्ताक्षर के समय असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के साथ मौजूद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे असम के लोगों के लिए एक सुनहरा दिन बताया.

महत्वपूर्ण मील का पत्थर... ऐतिहासिक उपलब्धि 

समझौते पर अमित शाह के एक पोस्ट को टैग करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज का दिन असम की शांति और विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. यह समझौता असम में स्थायी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा." PM मोदी ने ‘एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, "मैं इस ऐतिहासिक उपलब्धि में शामिल सभी लोगों के प्रयासों की सराहना करता हूं. साथ मिलकर, हम सब एकता, विकास और समृद्धि के भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं."

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उल्फा का गठन 1979 में ‘संप्रभु असम' की मांग को लेकर किया गया था. तब से, यह विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहा है, जिसके कारण केंद्र सरकार ने 1990 में इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था.

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