Explained: भारत को मिला 'ब्रह्मास्त्र', PFBR से परमाणु महाशक्ति बनेगा भारत, अमेरिका-चीन के पास भी ये ताकत नहीं

Atomic Energy News: भारत ने कलपक्कम परमाणु रिएक्टर के जरिये ऐसी नाभिकीय ऊर्जा की ऐसी कुंजी हासिल की है, जो देश को न केवल आत्मनिर्भरता देगा, बल्कि वो दूसरे देशों का मददगार भी बनेगा. आइए जानते हैं ये कैसे होगा...

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Nuclear reactor Prototype Fast Breeder Reactor PFBR
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  • भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी स्टेज हासिल कर परमाणु ऊर्जा क्षेत्र मेंअहम उपलब्धि पाई
  • PFBR रिएक्टर ऊर्जा उत्पादन के साथ नए प्लूटोनियम ईंधन का उत्पादन करता है, जिससे ईंधन की कमी दूर होगी
  • यह रिएक्टर भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश का प्रतीक है
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भारत ने सबसे उन्नत परमाणु रिएक्टर प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के जरिये ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए मील का पत्थर साबित होगा. तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित PFBR रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी के उस स्टेज को छू लिया है.भारत अब परमाणु ऊर्जा मामले में ईंधन के लिए दूसरे देशों पर मोहताज नहीं रहेगा. भारत दुनिया की परमाणु महाशक्ति के तौर पर उभरेगा. क्रिटिकैलिटी स्टेज से रिएक्टर अपनेआप संचालित परमाणु विखंडन के जरिये इतने न्यूट्रॉन पैदा करने लगता है कि किसी बाहरी दखल के बिना अपनेआप एटॉमिक रिएक्शन होती रहती है और नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन होने लगता है. पीएम मोदी ने भी इसे भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निर्णायक मोड़ बताया है. 

1. ब्रीडर तकनीक: ईंधन खत्म नहीं, बढ़ेगा

इस PFBR रिएक्टर की सबसे बड़ी खूबी इसके नाम ब्रीडर (Breeder) में छिपी है. सामान्य परमाणु रिएक्टर ईंधन (यूरेनियम) को ईंधन की तरह जलाकर ऊर्जा पैदा करते हैं लेकिन यह रिएक्टर ऊर्जा पैदा करने के साथ-साथ नया ईंधन भी पैदा करता है. जितना ईंधन (Plutonium-233) खर्च करता है, उससे कहीं ज्यादा नया ईंधन (Plutonium-239) पैदा करता है. इससे भारत के पास भविष्य के लिए परमाणु ईंधन का अटूट भंडार तैयार हो जाएगा.

2. परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण

भारत का परमाणु कार्यक्रम तीन चरणों ( 3 Stage Program) का है, जिसे एटमी प्रोग्राम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने डिजाइन किया था.पहला चरण उन PHWR रिएक्टरों का है, जो अभी संचालित है. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कलपक्कम भारत के एटमी कार्यक्रम के दूसरे चरण में एंट्री की मुहर है. 

4. थोरियम रिएक्टर का तीसरा चरण

थोरियम रिएक्टर तीसरा चरण है, PFBR ही वह जरिया है, जो भारत के पास मौजूद दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार को भविष्य में बिजली में बदल पाएगा.भारत के पास यूरेनियम की कमी है और हमें इसके लिए रूस, कजाकिस्तान या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है.

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5. थोरियम का खजाना

भारत के पास दुनिया का लगभग 25% थोरियम भंडार है. PFBR इस थोरियम का उपयोग करने की कुंजी है.भारत ने 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। PFBR की सफलता के बिना यह लक्ष्य नामुमकिन था.

6. भारत का बनेगा दबदबा

रूस के बाद कलपक्कम PFBR के चालू होने के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है. उसके पास कॉमर्शियल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है. अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देश भी भारत से पीछे हैं और उन्होंने अपने प्रोजेक्ट बीच में ही रोक दिए.

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7. मेड इन इंडिया

ये रिएक्टर स्वदेशी तकनीक से पूर्णतया भारत में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा डिजाइन और निर्मित है. इसमें 200 से अधिक भारतीय लघु उद्योगों का योगदान है.500 MW क्षमता वाला यह रिएक्टर भारत के 'नेट जीरो 2070' लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा. इससे 24 घंटे बिजली मिलेगी, जो सोलर या विंड एनर्जी से भी नहीं मिलता. 
 

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