नेपाल के Ex PM बाबूराम भट्टाराई ने कहा, मर चुका है राजतंत्र, वह फिर जिंदा नहीं होगा

नेपाल के राजनीतिक हालात और पहलगाम आतंकी हमले के बाद से बदल रही दक्षिण एशिया की राजनीति पर वहां के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल समाजवादी पार्टी- नया शक्ति के प्रमुख डॉक्टर बाबूराम भट्टाराई से खास बातचीत.

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नई दिल्ली:

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर बाबूराम भट्टराई इन दिनों भारत आए हुए हैं. उनकी यह भारत यात्रा ऐसे समय में हुई जब नेपाल में राजशाही के समर्थन में आंदोलन हो रहा है और भारत के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ है. नेपाल भारत का एक ऐसा पड़ोसी देश है जिसके साथ हमारा सदियों पुराना सामाजिक-आर्थिक संबंध है. अपनी भारत यात्रा के दौरान डॉ. भट्टाराई ने एनडीटीवी से एक खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने नेपाल के राजशाही समर्थक आंदोलन, नेपाल की राजनीतिक स्थिति, भारत-नेपाल संबंधों और पहलगाम हमले के बाद दक्षिण एशिया के बदलते राजनीतिक हालात पर चर्चा की. 

सवाल: नेपाल में अचानक से राजतंत्र के समर्थन में आंदोलन कैसे शुरू हो गया. इसके पीछे की परिस्थितियां क्या हैं.

जवाब: नेपाल में राजतंत्र के समर्थन में कोई आंदोलन नहीं है. इसे ऑर्केस्ट्रेड किया जा रहा है. हजार-दो हजार लोग तो कहीं भी तमाशा देखने के लिए चले आते हैं. इसलिए जो यहां प्रचार किया जा रहा है, वह सही नहीं है. नेपाल में राजतंत्र मर चुका है और जो मर चुका होता है वह वापस नहीं आता है. जो प्रचार किया जा रहा है, वह सही नहीं है, वह ऑर्केस्ट्रेड है.

सवाल: क्या इस तरह के आंदोलन के लिए नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता जिम्मेदार है. 

जवाब: इसलिए हम राजनीतिक विकल्प देने की बात कर रहे हैं. राजनीतिक दल नेपाल के लोगों की आकंक्षाओं को पूरा नहीं कर पाए. नेपाल की जनता को जिस आर्थिक विकास की जरूरत थी, उसे राजनीतिक दल पूरा नहीं कर पाए, उसी को पूरा करने के लिए हम विकल्प खड़ा करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. हमने नेपाल समाजवादी पार्टी- नया शक्ति नाम से एक राजनीतिक दल का गठन किया है. इसके जरिए हम नया विकल्प देने की कोशिश कर रहे हैं. लोग भविष्य की चुनौतियों का समाधान चाहते हैं, ऐसे में पीछे जाने का कोई सवाल ही नहीं है. नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता का समाधान यही है कि वहां के चुनाव प्रणाली की कमियों को दूर किया जाए. इसके लिए हमने मांग की है कि राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनाव की प्रणाली हो और पूर्ण समानुपातिक संसद हो. इससे नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता का समाधान हो जाएगा और देश आगे बढ़ेगा. राजतंत्र की फिर स्थापना की कोई गुंजाइश ही नहीं है. उसका कोई औचित्य भी नहीं है. 

सवाल: क्या नेपाल में चल रहे राजतंत्र समर्थक आंदोलन में भारत की कोई भूमिका है, क्योंकि वहां प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लिए भी नजर आए थे. 

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जवाब: इसमें भारत की कोई भूमिका नहीं है. कुछ लोग योगी जी की तस्वीर लिए हो सकते हैं, यह सच था या गलत था, इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है. इसमें भारत का कोई फायदा नहीं है. हमारा मानना है कि योगी जी ऐसा क्यों करेंगे, इससे भारत को क्या फायदा होगा, वह भारत के बहुत बड़े नेता हैं. मुझे लगता है कि यह सही नहीं है, हो सकता है कि किसी ने उनको बदनाम करने के लिए ऐसा किया हो. 

सवाल: नेपाल में माओवादी पार्टी ने इतना लंबा आंदोलन चलाया, राजतंत्र को उखाड़ फेंका, लोकतंत्र स्थापित किया और नेपाल को नया संविधान दिया, लेकिन इसके बाद माओवादी पार्टी बिखर क्यों गई. वह टुकड़ों-टुकड़ों में बंट क्यों गई. 

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जवाब: नहीं-नहीं ऐसा नहीं है. वहां अभी भी राजनीतिक दल हैं, जो राजतंत्र को खत्म कर गणतंत्र लाए हैं. हम जैसे लोग जिन्होंने इतना लंबा संघर्ष कर गणतंत्र लाएं हैं, हम अभी जिंदा हैं,  इसलिए जो प्रचार किया जा रहा है, वह सही नहीं है. जो कमियां और खामियां हैं, हम उन्हें दूर कर आगे बढ़ेंगे. इसलिए इस तरह के निगेटिव प्रचार का मैं खंडन करता हूं. हम सभी लोगों से आग्रह करते हैं कि किसी भ्रम में न पड़ें.

सवाल: माओवादी पार्टियों में किसी तरह की एकता का प्रयास हो रहा है क्या.

जवाब: जो माओवादी आंदोलन था, वह राजतंत्र को खत्म करने के लिए था. राजतंत्र खत्म होने के बाद अब आर्थिक विकास का नया एजेंडा है. नए तरीके से आगे बढ़ने के लिए ही मैं एक नए राजनीतिक विकल्प की बात कर रहा हूं. हम नया राजनीतिक दल और फ्रंट बनाकर आगे बढ़ेंगे. साल 2027 के चुनाव में हम नेपाल को एक नया विकल्प देंगे. 

सवाल: पहलगाम की आतंकी घटना को आप किस रूप में देखते हैं और इसका दक्षिण एशिया की राजनीति पर क्या असर होगा.

जवाब: पहलगाम की घटना बहुत निंदनीय है. यह आतंकवादी घटना है. आतंकवादी घटना का किसी भी रूप में समर्थन नहीं किया जा सकता है. इसकी मैं निंदा करता है. भारत, भारत की जनता और भारत की सरकार के प्रति हम अपना समर्थन व्यक्त करते हैं.

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सवाल: दक्षिण एशिया की बदलती राजनीति में आज दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (सार्क) जैसे संगठन की क्या भूमिका देखते हैं और उसके इस समय निष्क्रिय होने का क्या प्रभाव देखते हैं. 

जवाब: अगर सार्क काम कर रहा होता तो अच्छा होता है. लेकिन दक्षिण एशिया के दो बड़े देशों भारत और पाकिस्तान के संबंधों में दरार आ जाने की वजह से वह काम नहीं कर पा रहा है.हम चाहते हैं कि वह आगे बढ़े,लेकिन अगर वह सक्रिय नहीं है तो हम चाहते हैं कि बिम्सटेक जैसे संगठन आगे बढ़ें. भारत और पाकिस्तान को बातचीत के जरिए अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए, लड़ाई-झगड़े से कोई समाधान नहीं होगा, डिप्लोमैटिक तरीके से ही समस्याओं का समाधान होगा. 

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