विधायकों के बाद अब MPs भी करने वाले हैं बगावत? सूत्रों का दावा- बीजेपी के संपर्क में हैं TMC के 20 सांसद

विधानसभा के बाद अब संसद में भी टीएमसी के टूटने की खबर है. बताया जा रहा है कि टीएमसी के 20 सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं और पाला बदलना चाह रहे हैं.

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ममता बनर्जी का फोकस अब पार्टी और सिंबल बचाने पर है.
नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) टूट की कगार पर है. पहले तो टीएमसी के 60 विधायकों ने बगावत कर दी. और अब खबर है कि टीएमसी के 20 सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं. 

सूत्रों ने बताया कि टीएमसी के 20 सांसद पाला बदलने का मन बना रहे हैं और बीजेपी के संपर्क में बने हुए हैं. सूत्रों का यह भी कहना है कि टीएमसी सांसदों की हाई लेवल पर चर्चा चल रही है और उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आने की इच्छा जताई है. 

अगर ऐसा हुआ तो विधानसभा के बाद ममता बनर्जी को संसद में भी बड़ा झटका लगने वाला है. टीएमसी के संसद में कुल 41 सांसद हैं. लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13.

अगर संसद में पार्टी टूटती है तो ममता बनर्जी के लिए यह इसलिए भी बड़ा झटका होगा, क्योंकि उनकी इंडिया ब्लॉक की तरफ से संसद में उनकी पार्टी दूसरी सबसे बड़ी है. टीएमसी में यह टूट ममता बनर्जी के साथ के साथ-साथ संसद में विपक्ष के लिए भी बड़ा झटका होगा.

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विधानसभा में पहले ही टूट चुकी है टीएमसी

बंगाल विधानसभा में टीएमसी पहले ही टूट चुकी है. 60 बागी विधायकों ने बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया. विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के तौर पर मंजूरी भी दे दी है. साथ ही साथ बागियों ने 'असली तृणमूल' का दावा भी ठोंक दिया है.  

टीएमसी में बगावत के सुर बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद से ही उठने लगे थे. पार्टी का एक धड़ा खुलकर भ्रष्टाचार और आरजी कर रेप-मर्डर केस के मुद्दे से निपटने के तरीके पर ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर सवाल खड़े कर रहा था. इतना ही नहीं, पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मीटिंग में भी कई बागी विधायक पहुंचे थे.

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बढ़ती जा रही ममता की मुश्किलें

पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में लोकसभा और राज्यसभा में और भी टूट हो सकती है. ऐसा हुआ तो बागी गुट की स्थिति और मजबूत होगी.

वहीं, ममता बनर्जी का अब पूरा ध्यान पार्टी का नाम और सिंबल बचाने की कोशिश पर है. महाराष्ट्र के मामले को देखते हुए, यह काम मुश्किल लग रहा है.

चुनावी हार के बाद पार्टी में टूट पड़ना, नेता प्रतिपक्ष का पद गंवाना और फिरहाद हकीम जैसे नेता के इस्तीफे ने ममता बनर्जी पर काफी दबाव डाल दिया है. ममता बनर्जी अब अपनी पार्टी पर नियंत्रण बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं.

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