लोकसभा के विशेषाधिकार समिति का गठन, पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद संभालेंगे जिम्मेदारी

विशेषाधिकार समिति किसी भी लोकतांत्रिक देश की संसद के लिए बहुत जरूरी होती है. इसका सबसे मुख्य काम संसद और उसके सदस्यों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना है. संसद में काम करने वाले सांसदों को कुछ विशेष अधिकार मिले होते हैं ताकि वे बिना किसी डर या दबाव के जनता की आवाज उठा सकें.

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  • लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की नई विशेषाधिकार समिति का गठन किया है, जिसमें 15 सांसद शामिल हैं.
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
  • समिति का मुख्य कार्य संसद और सांसदों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना है.
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लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की नई विशेषाधिकार समिति का गठन कर दिया है. वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है.  इस समिति में देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के कुल 15 सांसदों को शामिल किया गया है, जिनमें कांग्रेस से तारिक अनवर, मनीष तिवारी, टीएमसी से कल्याण बनर्जी और बीजेपी से जगदंबिका पाल जैसे अनुभवी नाम शामिल हैं. यह नई समिति 3 मार्च से ही अपना कामकाज संभाल लेगी.

समिति में बीजेपी के बृजमोहन अग्रवाल, रामवीर सिंह विधुड़ी, संगीता सिंह देव, त्रिवेंद्र सिंह रावत शामिल किए गए हैं. कांग्रेस से मणिक्कम टैगोर, डीएमके से टी आर बालू और सपा से धर्मेंद्र यादव भी समिति के सदस्य होंगे. बजट सत्र के पहले हिस्से में विशेषाधिकार समिति का सवाल उठा था. सरकार ने कहा था कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया जाएगा. तब सवाल उठा था कि जब विशेषाधिकार समिति ही नहीं है तो नोटिस क्यों दिया जा रहा है. इसके बाद बीजेपी के निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सबस्टेंटिव मोशन का नोटिस स्पीकर को दिया.

विशेषाधिकार समिति किसी भी लोकतांत्रिक देश की संसद के लिए बहुत जरूरी होती है. इसका सबसे मुख्य काम संसद और उसके सदस्यों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना है. संसद में काम करने वाले सांसदों को कुछ विशेष अधिकार मिले होते हैं ताकि वे बिना किसी डर या दबाव के जनता की आवाज उठा सकें. अगर कोई व्यक्ति या संस्था सांसदों के काम में बाधा डालती है या सदन का अपमान करती है, तो यह समिति उस मामले की गहराई से जांच करती है.

सरल शब्दों में कहें तो यह समिति एक अदालत की तरह काम करती है. यह दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को बुलाकर उससे पूछताछ कर सकती है और जरूरत पड़ने पर सजा की सिफारिश भी कर सकती है. रविशंकर प्रसाद जैसे कानून के जानकार के अध्यक्ष बनने से यह उम्मीद जताई जा रही है कि सदन के भीतर अनुशासन और मर्यादा को और मजबूती मिलेगी. इस समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकतंत्र का मंदिर यानी संसद पूरी गरिमा के साथ अपना काम करता रहे और कोई भी इसकी मर्यादा को ठेस न पहुंचा सके.

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