- चेन्नई में कांग्रेस और डीएमके के बीच लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है
- कांग्रेस इस बार 40 सीटें लड़ना चाहती है, जबकि डीएमके 4-5 सीटें बढ़ाने पर विचार कर रही है
- डीएमके ने कांग्रेस की सत्ता में भागीदारी की मांग को अस्वीकार करते हुए बहुमत वाली सरकार चलाने पर जोर दिया है
चेन्नई में कांग्रेस और DMK के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत हो रही है.कांग्रेस की तरफ से संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के बीच में मुलाकात हुई है और आगे भी ये बातचीत जारी रहेगी. इस बैठक में डीएमके की तरफ से कनिमोझी और कांग्रेस के प्रभारी गिरीश चोडनकर भी मौजूद थे. कांग्रेस इस बार पिछली बार से अधिक सीटें लड़ना चाहती है,पिछली बार कांग्रेस तमिलनाडु में 25 सीटें लड़ी थीं और 18 सीटें जीती थी.इस बार कांग्रेस 2016 के फार्मूले की तरह 40 सीटें चाहती है. वैसे कांग्रेस के कुछ नेता इस बार सत्ता में भागीदारी की भी बात कर रहे हैं.कांग्रेस का कहना है कि डीएमके पिछली बार 173 सीटें लड़ीं थी. जिसमें 133 सीटों पर उसे सफलता मिली थी यानि डीएमके 40 सीट हार गई थी.कांग्रेस का कहना है कि डीएमके उन 40 हारी हुई सीटों में से 15 सीट दे मगर डीएमके फिलहाल इसके लिए राजी नहीं है.
कांग्रेस की तरफ से के सी वेणुगोपाल ने एक राज्यसभा की सीट की भी मांग रखी है,कांग्रेस को उम्मीद है कि डीएमके उनकी यह मांग मान लेगी.मगर जहां तक सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग है डीएमके तैयार नहीं दिख रही है. इतना संकेत जरूर मिल रहे हैं कि डीएमके शायद कांग्रेस को 4-5 सीट और देने पर विचार कर सकती है. मगर 40 सीट तो मुश्किल है.डीएमके कांग्रेस को 4-5 सीटें देने पर तभी सोच सकती है यदि राहुल गांधी खुद इस बातचीत का हिस्सा बनें.
इसलिए डीएमके यह भी कर सकती है कि यदि वह कांग्रेस की सीटों की संख्या बढ़ाती है तो उनके उम्मीदवार कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस का तर्क ये है कि वो पिछली बार 25 सीटों पर लड़ कर 18 जीतीं थी इसलिए उनका स्ट्राइक रेट अच्छा है इसलिए उनकी सीटों की संख्या बढ़ाई जाए मगर डीएमके इस तर्क को मानने से इंकार कर रही है.डीएमके का कहना है कि इस बार उनके खेमे में सहयोगी दलों की संख्या ज्यादा है इसलिए वो दो चार सीटों से ज्यादा कांग्रेस को दे ही नहीं सकते जबकि कांग्रेस का कहना है कि हर लोकसभा क्षेत्र में उन्हें कम से कम एक विधानसभा सीट तो मिलनी चाहिए तब यह आंकडा 39 सीट का बनता है.
डीएमके के साथ दिक्कत ये है कि उनके अपने पुराने सहयोगियों जैसे कांग्रेस,सीपीआई,सीपीएम वीसीके के अलावा आईयूएमएल और गठबंधन का इस बार हिस्सा बनीं डीएमडीके के साथ साथ कमल हसन को भी कुछ सीटें देनी है. इसलिए वो कांग्रेस की सीटें 2-4 से अधिक बढ़ा ही नहीं सकती है.दूसरी तरफ सूत्रों की मानें तो एक्टर विजय की पार्टी टीवीके कांग्रेस को 70 सीटें देने का ऑफर दे रही है.
मगर ऐसे हालत में कांग्रेस को डीएमके गठबंधन से निकलना होगा और इंडिया गठबंधन से कांग्रेस का एक मजबूत सहयोगी से उन्हें हाथ धोना पड़ेगा.कांग्रेस ने उन विधानसभा क्षेत्रों के नाम भी डीएमके को सौंप दिए हैं. जहां वो चुनाव लड़ना चाहते हैं.डीएमके की तरफ से कुछ दिनों पहले कनिमोझी राहुल गांधी से दिल्ली में मिल चुकी हैं उनके साथ डीएमके सांसद ए राजा भी हैं तो कांग्रेस के तरफ से के सी वेणुगोपाल और प्रभारी के साथ छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव शामिल हैं.
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