- ईरान, अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध की स्थिति ने भारत के सामरिक और आर्थिक हितों को मुश्किल में डाला
- भारत के ईरान और इजरायल दोनों से अच्छे संबंध हैं, अरबों डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर संकट के बादल मंडराए हैं
- मध्य एशिया से भारत का लगभग चालीस से पैंतालीस प्रतिशत कच्चा तेल आयात होता है
ईरान, अमेरिका–इजरायल के बीच युद्ध की स्थिति ने पूरे मध्य एशिया क्षेत्र में भारत के सामरिक और आर्थिक हितों के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ा दी हैं. भारत को इस टकराव के राजनयिक और सुरक्षा आयामों से निपटने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी करनी होगी. भारत के इजरायल और ईरान दोनों से अच्छे संबंध हैं. युद्ध का माहौल गहराने से इन देशों के साथ होने वाले अरबों डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. भारत–ईरान के बीच दो अरब डॉलर से कुछ कम का व्यापार होता है, जबकि इजरायल के साथ भारत का कुल व्यापार FY 2024–2025 में USD 3.62 बिलियन रहा.
एफटीए वार्ताएं और समय का संकट
यह संकट ऐसे समय पैदा हुआ है जब भारत इजरायल और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत कर रहा है. बढ़ते तनाव से इन वार्ताओं के समय–निर्धारण और प्राथमिकताओं पर प्रभाव पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का सबसे ज़्यादा कच्चा तेल मध्य एशिया के देशों से आयात करता है. अनुमानतः 40%–45% कच्चे तेल का आयात इस क्षेत्र से होता है. युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें महंगी होने का खतरा बढ़ा है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत USD 73/बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले कुछ महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है. यदि युद्ध लंबा चला, तो भारत के ऑयल इम्पोर्ट बिल पर दबाव और बढ़ेगा.
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भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, वर्कर्स और स्टूडेंट्स
पूरे मध्य एशिया क्षेत्र में लाखों भारतीय वर्कर्स और स्टूडेंट्स रहते हैं. उनकी सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. संघर्ष क्षेत्र में हालात बदलने पर इवैक्यूएशन/एडवाइजरी जैसी व्यवस्थाओं की आवश्यकता पड़ सकती है. इजरायल पर ईरान के हमले के तुरंत बाद तेल अवीव में भारतीय दूतावास ने ‘X' पर एडवाइजरी जारी की. दूतावास ने इजरायल में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने, हर समय सतर्क रहने और इजरायली अधिकारियों/होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा.
साथ ही निर्धारित शेल्टर स्थलों के पास रहने, निवास/कार्यस्थल के निकट सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखने और अगली सूचना तक गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी गई. नागरिकों से स्थानीय समाचार, आधिकारिक घोषणाओं और आपात चेतावनियों पर नियमित नज़र रखने को भी कहा गया.
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विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर ‘X' पर लिखा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तेजी से बढ़ते तनाव बहुत चिंताजनक हैं. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और भारत सरकार से तत्काल तथा सक्रिय कदम उठाने का आग्रह किया.
विदेश मंत्रालय का वक्तव्य
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान और गल्फ क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों से भारत बेहद चिंतित है. भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से रोकने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया. तनाव कम करने और मूल मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति पर ज़ोर दिया गया. बयान में कहा गया कि सभी राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए. क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशन नागरिकों के संपर्क में हैं और उन्हें उचित सलाह जारी की जा रही है,सतर्क रहें, मिशनों से संपर्क में रहें और स्थानीय सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें.














