- इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से 11 मौतें और हजार से अधिक लोग बीमार हुए हैं.
- राज्य सरकार मौतों का कारण पाइपलाइन लीकेज बता रही है जबकि विपक्ष, बीजेपी के नेता प्रशासनिक विफलता मान रहे हैं.
- पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने प्रशासन को दोषी ठहराते हुए जवाबदेही और दंड की मांग की है.
इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हो रही मौतों की संख्या बढ़ने के साथ ही इस त्रासदी पर राजनीतिक टकराव तेज़ हो गया है. यह विवाद अब केवल सत्ता और विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर भी सार्वजनिक असहमति सामने आ गई है. जहां राज्य सरकार इस घटना को पाइपलाइन लीकेज का नतीजा बता रही है, वहीं विपक्षी दलों के साथ-साथ बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी इसे नैतिक और प्रशासनिक विफलता बताते हुए शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें- इंदौर के अपर आयुक्त को तत्काल हटाने का निर्देश, दूषित पानी को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी
पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता उमा भारती ने इस मामले में सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए एक के बाद एक सार्वजनिक पोस्ट किए. उन्होंने लिखा, “सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं.”
एक दूसरे पोस्ट में उन्होंने कहा “इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं. जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे, पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!”उमा भारती ने त्रासदी को प्रदेश और सरकार के लिए कलंक बताते हुए लिखा “साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं. प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है.”
पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा
उन्होंने मुआवजे को नाकाफ़ी बताते हुए कहा, “जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं. इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीड़ितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा.” और अंत में उन्होंने लिखा क यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है.
प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा-विपक्ष का हमला
वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने, राहुल गांधी के समर्थन के साथ, इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ़ तीखा राजनीतिक हमला शुरू कर दिया है. राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, “इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा. घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान. जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया.”
उन्होंने सवाल उठाए कि लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला. समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी. इन सवालों को उन्होंने जवाबदेही से जोड़ा, “ये ‘फोकट' सवाल नहीं ये जवाबदेही की मांग है. साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है. इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है.
'मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका'
राहुल गांधी ने इसे व्यापक कुशासन से जोड़ते हुए कहा कि मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें. और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं.
दूषित पानी से 11 मौतों की पुष्टि
अब तक आधिकारिक तौर पर कम से कम 11 मौतों की पुष्टि हुई है और भगीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 1,400 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं. जांच में सामने आया है कि स्थानीय पुलिस चौकी के पास एक सार्वजनिक शौचालय के नज़दीक मुख्य पाइपलाइन में लीकेज हुआ, जिससे सीवेज पीने के पानी में मिल गया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, तीन सदस्यीय समिति गठित की है और जांच पूरी होने के बाद सख़्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है.













