ईरान दूतावास ने कहा नगद भी दे सकते हैं मदद, सोशल मीडिया पर क्या लिख रहे हैं मददगार

भारत में ईरानी दूतावास ने भारतीयों से मदद लेने के लिए जो बैंक खाता नंबर जारी किया था, उस पर भुगतान में कुछ दिक्कतें आ रही हैं. इसके बाद दूतावास ने कहा है कि मदद करने के इच्छुक लोग नगद भी जमा कर सकते हैं. उसका कहना है कि दिक्कतों को जल्द दूर कर लिया जाएगा.

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नई दिल्ली:

अमेरिका-इजरायल  और ईरान के युद्ध का आज 17वां दिन है. इस युद्ध को लेकर भारत में ईरान के प्रति सहानुभूति देखी जा रही है. खासकर अमेरिकी हमले में एक स्कूल में  165 बच्चों की हुई मौत के बाद. युद्ध के खिलाफ भारत के अलग-अलग शहरों में अमेरिका-इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए. वहीं भारतीयों ने ईरान की तरफ मदद का हाथ बढाया. ईरान पहले तो मदद लेने के लिए राजी नहीं हुआ. उसका कहना था कि वह एक सक्षम देश है.नई दिल्ली स्थिति ईरानी दूतावास में तीन दिन के लिए ओपन कॉन्डोलेंस बुक रखी गई. इसमें हजारों लोग शोक जताने आए. इस दौरान लोगों ने अपील की कि वो कुछ डोनेशन या मेडिकल उपकरण आदि ईरान को दान करना चाहते हैं, जो मजलूमों के काम आ सके.इस अपील पर ईरान एंबेसी ने एक बैंक अकाउंट नंबर जारी किया. लोगों ने उसमें मदद भेजना शुरू किया. लेकिन कुछ समय बाद ही लोगों को ट्रांजिशन फेल के मैसेज आने लगे. इससे लोग परेशान भी हो गए.अब ईरान ने कहा है कि लोग सीधे दूतावास आकर नगद में भी मदद कर सकते हैं.

ईरान एंबेसी ने ट्वीट करते हुए कहा कि ईरान में प्रभावित नागरिकों की मदद के लिए भारतीय भाइयों-बहनों ने दूतावास से बार-बार अनुरोध किया कि वे मानवीय सहायता भेजना चाहते हैं. इस अपील के जवाब में ईरान एंबेसी ने न्यू दिल्ली में एक बैंक खाता जारी किया था, लेकिन अब कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण ऑनलाइन ट्रांसफर में दिक्कत आ रही है. एंबेसी ने 15 मार्च 2026 को एक पोस्ट में बताया कि उनके खाते में फंड ट्रांसफर करने में कुछ कठिनाइयां सामने आई हैं. उन्होंने उन सभी भारतीयों का शुक्रिया किया, जिन्होंने अपना सहयोग दिया. एंबेसी का कहना है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा. एंबेसी ने लोगों से GPay से भुगतान न करने की अपील की है, क्योंकि यह काम नहीं कर रहा है. एंबेसी का कहना है कि इच्छुक लोग एंबेसी आकर नगद में भी अपनी मदद जमा कर सकते हैं.  

क्या ईरान क्यूआर कोड भी जारी करेगा

ईरानी एंबेसी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अपने खाते का नंबर और उसका आईएफएससी कोड जारी किया था. इसमें कोई QR कोड नहीं दिया गया था. लेकिन अब एंबेसी QR कोड जारी करने का विचार बना रही है. इसके बाद लोग सीधे स्कैन कर अपनी मदद भेज सकेंगे. 

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जिन लोगों ने ईरान को मदद भेजी है, उनमें से कई लोग सोशल मीडिया साइट X पर स्क्रीन शॉट डाल रहे हैं. इनसे पता चलता है कि लोगों ने 51 रुपए से लेकर 20 हजार तक की मदद भेजी है. लोग रिमार्क में लिख रहे हैं कि हम ईरान के साथ है. वहीं एक ने लिखा है कि ईरान में उन बच्चियों के परिवार के लिए जिनका कत्ल हो गया, एक ने लिखा कि डेथ टू अमेरिका इजरायल, एक यूजर ने लिखा कि मैं हिंदू हूं लेकिन ईरान के साथ खड़ा हूं, क्योंकि हिन्दुस्तान मजलूम के साथ खड़ा रहता है. हालांकि कई यूजर ने पेमेंट फेल के स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किए. कुछ यूजर्स ने युद्ध की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उम्मीद है स्थिति जल्द सामान्य हो और अमेरिका अपनी आक्रामकता बंद करे. एक पोस्ट में ईरान का धन्यवाद किया गया है कि उन्होंने भारत जाने वाले टैंकरों को अनुमति दी. इससे भारत में ऊर्जा संकट से बचा जा सका.

कैसे रहे हैं ईरान-भारत के संबंध 

ईरान और भारत के हमेशा से ही बेहतर संबंध रहे हैं.पहलगाम हमले के बाद सबसे पहले भारत के साथ खड़े होने वाला और आतंकवाद के खिलाफ बोलने वाला ईरान ही था. भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हमने ईरान सरकार से बात की कि भारत के लिए गैस से लदे जहाजों को आने दिया जाए क्योंकि यहां के लोग ईरान के प्रति हमेशा चाहत रखते हैं और हमारे दुख में वो सड़कों तक पर थे. इसके बाद भारत के शिप को मंजूरी भी मिली.

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