- 20 साल पहले हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 4 वर्षीय प्रिंस बोरवेल में गिर गया था, जिसकी बचाव में पूरा देश जुड़ा था
- प्रिंस को बचाने के लिए सेना ने समानांतर गड्ढा खोदकर पाइप के जरिए 50 घंटे बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला था
- प्रिंस ने आईटीआई से प्लंबिंग का कोर्स पूरा किया और अब इसी पेशे में नौकरी की तलाश कर रहा है
Prince Life Struggle: 20 साल पहले की वो तस्वीरें शायद अब भी एक पूरी पीढ़ी को याद होंगी जब टीवी स्क्रीन पर पूरा देश एक ही खबर के लिए पलकें बिछाए बैठा था. वो खबर आई थी हरियाणा के कुरुक्षेत्र से...जहां एक 4 साल का मासूम बच्चा प्रिंस बोरवेल के गड्ढे में गिर गया था. तब उसके लिए हर मंदिर और मस्जिद में दुआएं मांगी जा रही थीं.करीब 50 घंटे तक जब पूरा देश सांसें रोककर उस नन्हे 'प्रिंस' की सलामती की खोज-खबर ले रहा था. आज वही 'ट्यूबवेल बॉय' 24 साल का हो चुका है. उस वक्त जिसे मौत के मुंह से निकालने के लिए पाइपों का जाल बिछाया गया था, आज वही प्रिंस पाइपों के जरिए अपनी तकदीर और भविष्य को संवारने में जुटा है.प्रिंस ने आईटीआई (ITI) से प्लंबिंग का कोर्स पूरा कर लिया है और अब वह इसी क्षेत्र में पेशेवर रूप से काम करते हुए एक स्थायी नौकरी की तलाश में है.
चूहे के पीछे दौड़ते हुए बोरवेल में गिरा था प्रिंस
प्रिंस की यादों में वह खौफनाक मंजर आज भी धुंधला नहीं हुआ है. उस दिन की शुरुआत एक साधारण खेल से हुई थी, जब प्रिंस अपने दोस्त अंगरेज के साथ ट्यूबवेल के पास खेल रहे थे. खेल-खेल में उनकी नजर एक चूहे पर पड़ी और शरारत में दोनों उसके पीछे भागने लगे. वह चूहा एक बोरवेल में जा घुसा, जिसके ऊपर एक बोरी ढकी हुई थी. मासूमियत में दोनों दोस्त उस बोरी पर कूदने लगे जो अचानक फट गई. अंगरेज तो बच गया, लेकिन प्रिंस सीधे 60 फीट नीचे उस अंधेरी कालकोठरी में जा गिरा, जहां से बाहर आने की उम्मीद बेहद कम थी.
50 घंटे की वो खौफनाक जंग और सेना का जांबाज ऑपरेशन
बोरवेल के भीतर प्रिंस ने मौत को करीब से देखा था. ऊपर से माता-पिता की आती आवाजें उसे हिम्मत दे रही थीं, लेकिन बचाव के शुरुआती प्रयास विफल हो रहे थे. बचाव दल ने एक बार रस्सी के साथ बल्ब नीचे भेजा था, लेकिन वह बल्ब इतना गर्म हो गया कि प्रिंस के हाथ जल गए और वह रस्सी नहीं पकड़ पाया. आखिरकार जब स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए, तब सेना को मोर्चा संभालना पड़ा. सेना ने बोरवेल के समानांतर एक बड़ा गड्ढा खोदा और पाइप के जरिए एक रास्ता बनाकर करीब 50 घंटे बाद प्रिंस को सुरक्षित बाहर निकाला. वह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरे भारत के लिए दुआओं और उम्मीदों का प्रतीक बन गया था.
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अब पाइप और औजारों के जरिए भविष्य की तलाश
वक्त का पहिया घूमा और वही प्रिंस, जिसे कभी पाइप के जरिए बाहर निकाला गया था, आज पाइपों की बारीकियों को समझकर अपना भविष्य बना रहा है. प्रिंस ने आईटीआई से प्लंबिंग का कोर्स पूरा किया और अब वह इसी विधा में पारंगत होकर काम कर रहा है. हालांकि, उसका सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का था और इसके लिए उसने अपनी फिटनेस पर कड़ी मेहनत भी की, लेकिन कम कद की तकनीकी बाधा के कारण वह वर्दी नहीं पहन सका. पर इस असफलता ने उसे तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया.
उम्मीदों के साथ नई नौकरी की तलाश
आज प्रिंस पूरी तरह से सकारात्मक है और अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है. प्लंबर के रूप में काम करते हुए वह अब एक ऐसी नौकरी की तलाश में है जो उसके जीवन को स्थिरता दे सके. बोरवेल के उस अंधेरे ने उसे सिखाया कि हार कभी नहीं माननी चाहिए, और यही जज्बा उसे आज समाज में अपनी एक नई पहचान दिलाने में मदद कर रहा है. प्रिंस का संघर्ष और आज की उसकी मेहनत उन सभी के लिए मिसाल है, जो मुश्किल हालातों से लड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं.
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