- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने AMCA प्रोग्राम से हटाए जाने की खबरों को लेकर कहा कि इसकी कोई सूचना नहीं है.
- HAL के पास मजबूत ऑर्डर बुक है और वह 2032 तक उत्पादन योजनाओं के साथ कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है.
- AMCA पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है, जो भारत की वायुसेना की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम को लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने मीडिया में चल रही खबरों पर सफाई दी है. इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस प्रोग्राम से HAL को बाहर कर दिया गया है और यह प्रोग्राम अब प्राइवेट प्लेयर्स संभालेंगे. साथ ही दावा किया जा रहा है कि प्रोग्राम में तेजी लाने के लिए ऐसा किया गया है. हालांकि HAL ने स्पष्ट किया है कि उसे अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है.
कंपनी का कहना है कि जब तक सरकार या संबंधित एजेंसी की ओर से औपचारिक जानकारी नहीं मिलती, तब तक इन खबरों पर कोई टिप्पणी करना संभव नहीं है. साथ ही कहा कि इस बारे में आधिकारिक जानकारी मिलने पर HAL सूचना देगी.
HAL के पास काफी मजबूत ऑर्डर बुक
अपने उत्पादों की डिलीवरी को लेकर भी HAL ने प्रतिक्रिया दी है. कंपनी ने बताया कि उसके पास अभी काफी मजबूत ऑर्डर बुक हैं यानी उसे जितने ऑर्डर मिले हैं, वो पक्के हैं और HAL उन पर लगातार काम कर रही है. कंपनी की आमदनी को लेकर भी स्थिति साफ है. 2032 तक उसका प्रोडक्शन प्लान मजबूत बना हुआ है.
HAL के पास हैं ये बड़े प्रोजेक्ट्स
HAL कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम कर रही है. इनमें इंडियन मल्टीरोल (आईएमआरएच) हेलीकॉप्टर, एलसीए तेजस का मार्क-2 वेरिएंट और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (कैट्स) सिस्टम शामिल हैं. ये सभी प्रोजेक्ट्स न सिर्फ HAL की ऑर्डर बुक बल्कि कंपनी की तकनीक को भी मजबूत बनाएंगे. 2032 के बाद इनके प्रोडक्शन में आने की उम्मीद है.
वहीं मिलिट्री के अलावा अब HAL सिविल एविएशन में भी आगे बढ़ रही है. ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (एनजी) हेलीकॉप्टर, हिंदुस्तान-228 और एसजे-100 विमान पर काम चल रहा है. कंपनी का लक्ष्य आय बढ़ाना और लंबे समय तक स्थिर ग्रोथ पाना है.
क्या है AMCA और क्यों है जरूरी?
- AMCA भारत का फिफ्थ जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट है. दुनिया भर के कई देश ऐसे विमानों को ऑपरेट कर रहे हैं. इस पीढ़ी के विमानों की खासियत इनका रडार क्रॉस सेक्शन कम होना है यानी ये रडार पर मुश्किल से दिखते हैं या बहुत छोटे नजर आते हैं. इसलिए इनकी मौजूदगी का पता लगाना मुश्किल होता है. यह विमान भविष्य में भारतीय वायुसेना की ताकत की रीढ़ बनेगा. इस प्रोजेक्ट को डीआरडीओ के तहत काम करने वाली एजेंसी एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) लीड कर रही है.
- AMCA में स्टेल्थ डिजाइन होगा. अंदर हथियार रखने की सुविधा होगी, जिसे इंटर्नल वेपन बे कहा जाता है. एडवांस्ड सेंसर और एवियोनिक्स होंगे. सुपरक्रूज यानी बिना आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल किए भी सुपरसॉनिक रफ्तार पर जाने की क्षमता भी होगी. यह प्रोजेक्ट भारत को चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगा जो स्टेल्थ फाइटर ऑपरेट कर रहे हैं.
- इस प्रोजेक्ट को लेकर HAL से सबको उम्मीद थी क्योंकि HAL भारत की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी है. तेजस, सुखोई-30 एमकेआई, ध्रुव और प्रचंड HAL ही बनाती है. सेनाओं के लिए इस कंपनी ने शानदार काम किया है. इसलिए माना जा रहा था कि AMCA में भी HAL की बड़ी भूमिका होगी. हालांकि जब HAL के बाहर होने की खबरें आईं, तो सब हैरान रह गए.
AMCA की बिडिंग कैसे हुई?
- सरकार ने इस बार नया तरीका अपनाया.
- प्राइवेट कंपनियों को भी मौका दिया गया.
- 2025 में एडीए ने ईओआई जारी किया.
- इसका मकसद सही कंपनियों का चयन करना था.
- कुल सात कंसोर्टियम बोली लगाने मैदान में उतरे. इनमें सरकारी और निजी कंपनियां थीं.
वह शर्त जिसने HAL को रोका
ईओआई में एक खास शर्त थी. किसी कंपनी का ऑर्डर बुक उसकी सालाना कमाई से तीन गुना से ज्यादा नहीं होना चाहिए. अगर यह सीमा पार होती है तो उस पैरामीटर में जीरो मार्क्स मिलते हैं.
HAL क्यों फेल हुई?
एचएएल की सालाना कमाई करीब 30,000 करोड़ रुपये है. उसकी ऑर्डर बुक 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. यह अनुपात तय सीमा से बहुत ज्यादा है. इसी वजह से बिडिंग में एचएएल को पूरे अंक नहीं मिले और वह शॉर्टलिस्ट नहीं हो सकी.
सरकार की क्या सोच है?
सरकार नहीं चाहती कि एएमसीए में देरी हो. एचएएल पहले से ही कई बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त है. इसलिए ऐसी कंपनी चुनी जा रही है, जिसका वर्कलोड संतुलित हो और जो अपना पूरा फोकस AMCA पर दे सके.
क्या HAL पूरी तरह बाहर है?
इसका जवाब है नहीं. HAL इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह बाहर नहीं हुई है. अभी बात सिर्फ प्रोटोटाइप फेज की है. भविष्य में सीरियल प्रोडक्शन के समय HAL की भूमिका फिर सामने आ सकती है. HAL पहले से AMCA के कुछ डिजाइन कामों में शामिल है. साथ ही HAL का पास विमान प्रोडक्शन का एक ईकोसिस्टम पहले से है. इसलिए ये कहना सही नहीं होगा कि उसे इस प्रोजेक्ट से अलग रखा जाएगा. ये संभव है कि अब अधिकतर काम कोई दूसरी कंपनी करेगी.
HAL सवालों के घेरे में रही है?
HAL ने जैसा खुद कहा कि उसके पास एक बहुत ही मजबूत ऑर्डर बुक है, लेकिन पहले भी तेजस को लेकर इस कंपनी की आलोचना होती रही है. वजह है तेजस विमान की डिलीवरी में देरी और इस देरी का वायुसेना की क्षमता पर असर पड़ा है.
फरवरी 2025 में एयरो इंडिया के दौरान वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी ये मुद्दा उठाया था. उस समय एक वीडियो खूब वायरल हुआ था जिसमें वो HAL द्वारा LCA की डिलीवरी में देरी की बात कर रहे थे. उन्होंने कहा था कि मैं आपको केवल यह बता सकता हूं कि हमारी आवश्यकताएं और चिंताएं क्या हैं. फिलहाल मैं HAL पर भरोसा नहीं कर रहा हूं, जो कि बहुत गलत बात है. HAL हमारी अपनी कंपनी है, हम सबने वहां काम किया है. मैंने खुद वहां सेवाएं दी हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हम मिशन मोड में नहीं हैं. HAL बस ‘सब कुछ हो जाएगा' वाले ढर्रे पर चल रही है.
एयर चीफ मार्शल इस वीडियो में आगे कहते हैं, "मुझसे वादा किया गया था कि जब मैं फरवरी में यहां आऊंगा तो हमारे पास इंजन के अलावा 11 Mk1A तैयार होंगे, पर अभी तक एक भी विमान तैयार नहीं है. मजा नहीं आ रहा यार."
प्रोजेक्ट में देरी खड़ी कर रही परेशानी
जब एयर चीफ मार्शल ये कहते हैं कि HAL उनकी अपनी कंपनी है, फिर भी इतनी देरी हो रही है. इससे ये साफ जाहिर होता है कि HAL ने तेजस में वाकई काफी देरी की. जो प्रोजेक्ट 1983-84 में शुरू हुआ था, आज 2026 में अगर उसकी बात हो रही है, तो ये अपने आप में चिंताजनक है. इतना ही नहीं ध्रुव हेलीकॉप्टर के मामले में भी HAL ने देरी की है. इस देरी के कई कारण हो सकते हैं. संभव है कि इसमें विदेश से आने वाली इंजन और क्रिटिकल उपकरणों की डिलीवरी में देरी का भी रोल हो, लेकिन भारतीय वायुसेना तो हमेशा से HAL पर ही निर्भर रही है और उसकी ओर से कोई भी देरी देश की सुरक्षा पर असर डाल सकती है क्योंकि भारत की स्थिति ऐसी है कि हर तरफ चाहे वो पाकिस्तान हो, चीन हो या बांग्लादेश हो, हर जगह भारत विरोधी भावना है. पाकिस्तान लगातार अपने फाइटर जेट के बेड़े चीन की मदद से अपग्रेड करता जा रहा है. चीन स्टेल्थ फाइटर के साथ ऑपरेट कर रहा है.
ऐसे में ये काफी जरूरी हो जाता है कि भारत की सेनाओं को समय पर उचित और जरूरी साजो-सामान, विमान, हथियार आदि समय पर मिलें क्योंकि पड़ोसी का हमला ये देखकर नहीं होगा कि एचएएल की ऑर्डर बुक कैसी है.














