गुरुग्राम में 0.6°C तक चला गया पारा, आखिर क्यों पड़ गई इतनी कड़ाके की ठंड?

गुरुग्राम के कई हिस्सों में तापमान एक डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला गया, जिससे यह कई मशहूर हिल स्टेशनों से भी ज्यादा ठंडा हो गया.

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  • गुरुग्राम में इस सप्ताह तापमान एक डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरकर दशकों की सबसे सर्द रातों का अनुभव हुआ.
  • भारतीय मौसम विभाग ने NCR में कोल्ड वेव और घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.
  • दिल्ली का न्यूनतम तापमान शिमला से कम रहा, जिससे मैदानी इलाकों में पहाड़ों से अधिक ठंड महसूस हुई.
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गुरुग्राम ने इस हफ्ते दशकों की सबसे सर्द रातों में से एक का सामना किया. शहर के कई हिस्सों में तापमान एक डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला गया, जिससे यह कई मशहूर हिल स्टेशनों से भी ज्यादा ठंडा हो गया. पिछले लगभग 50 सालों में गुरुग्राम में इतनी ठंड नहीं पड़ी थी, जिससे लोग पूरी तरह चौंक गए.  यह ठंड का दौर एक बार फिर दिखाता है कि इस सीजन में उत्तर-पश्चिम भारत पर सर्दी की लहर कितनी जोरदार है.

कोल्ड वेव का ऑरेंज अलर्ट जारी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह रिकॉर्ड तापमान एक तीव्र ठंड की लहर के कारण है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के मैदानी इलाकों को प्रभावित कर रही है. इसके चलते कोल्ड वेव और घने कोहरे के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.

शिमला से ज्यादा ठंडा दिल्ली

दिल्ली में न्यूनतम तापमान करीब 3°C रहा, जबकि शिमला में 4°C, जो यह बताता है कि मैदानी इलाकों में ठंड इस बार पहाड़ों से भी ज्यादा है.

दिल्ली में कड़ाके की ठंड

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इतनी ठंड क्यों पड़ रही है?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस असामान्य ठंड के पीछे कई कारण हैं:

पश्चिमी विक्षोभ का असर

हाल ही में हिमालय पर पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फबारी हुई. इसके बाद तेज उत्तर-पश्चिमी हवाएं बर्फीली हवा को मैदानी इलाकों तक ले आईं.

साफ आसमान से भी बढ़ती ठंड

रात में बादल न होने से धरती की गर्मी तेजी से अंतरिक्ष में निकल जाती है, जिससे तापमान और गिर जाता है.

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ठंडी हवा का जमाव

बर्फीली हवा का मैदानी इलाकों में जमाव हुआ, जिससे ठंड की लहर और तेज हो गई.

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हिल स्टेशनों से भी ज्यादा ठंड गुरुग्राम में कैसे?

पहाड़ी इलाकों में बादल गर्मी को रोकते हैं, इसलिए वहां तापमान उतना नहीं गिरता. यही वजह है कि गुरुग्राम इस बार कई हिल स्टेशनों से भी ज्यादा ठंडा रहा.

ठंड का क्या असर?

इतनी कड़ाके की ठंड में वाहनों, फसलों और घास पर पाला जम गया है.  घना कोहरे से सड़क पर यात्रा खतरनाक और धीमी हो गई है. 

लोगों में हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट, फ्लू और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ा है.  वहीं ठंड से खेती किसानी भी प्रभावित हो रही है. ज्यादा ठंड से कुछ फसलों को नुकसान हुआ है.

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