उत्तरी कश्मीर की एलओसी से सटी गुरेज घाटी में सर्दियों के मौसम में एक बार फिर रौनक लौट आई है. करीब चार फीट तक बर्फबारी होने के बावजूद यहां जीवन थमा नहीं है. ये घाटी सर्दियों में जमा देने वाली ठंड के लिए जानी जाती है. लेकिन इतनी ठंड भी यहां के युवाओं के हौसले को डिगा नहीं सकी. इस घाटी में रहने वाले युवाओं ने खुदको व्यस्त रखने के लिए बर्फ को ही मैदान के रूप में अपना लिया है. ये युवा अब बर्फ से ढके मैदानों में स्नो क्रिकेट, फुटबाल और स्कीइंग जैसे गेम्स खेल रहे हैं.
गुरेज घाटी सर्दियों में लंबे समय तक बाकी कश्मीर से कटी रहती है. बांडीपोरा-गुरेज सड़क भारी बर्फबारी के कारण बंद हो जाती है. यही सड़क घाटी को जोड़ने का एकमात्र रास्ता है. इसके बावजूद स्थानीय युवा और प्रशासन मिलकर शीतकालीन खेलों को बढ़ावा दे रहे हैं. बर्फ पर क्रिकेट मैच हो रहा है और स्थानीय लोग इनका जोश भी बढ़ा रहे हैं. युवा खिलाड़ी सफेद मैदानों पर बल्ला और गेंद के साथ नजर आते हैं. साथ ही जमी हुई ढलानों पर स्कीइंग भी की जा रही है. यह दृश्य घाटी को एक अलग ही पहचान देता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्नो क्रिकेट अब यहां एक परंपरा बन चुकी है. हर साल सर्दियों में टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं. इससे युवाओं को व्यस्त रहने का मौका मिलता है. वे नशे और गलत गतिविधियों से दूर रहते हैं. स्थानीय लोग बताते है कि युवा वे पूरे साल इस मौसम का इंतजार करते हैं.बर्फ पर खेलना उन्हें ऊर्जा और उत्साह देता है. लंबी सर्दियों में यह उनके लिए सबसे अच्छा समय होता है.
इन खेल आयोजनों को भारतीय सेना का भी समर्थन मिल रहा है. सेना की ओर से युवाओं को बेसिक स्कीइंग ट्रेनिंग दी जा रही है. इससे युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है.यहां पर लोगों का कहना है कि अगर सही सुविधाएं मिलें, तो गुरेज के युवा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं.बर्फ यहां के जीवन का हिस्सा है. इसे अवसर में बदला जा सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गुरेज को शीतकालीन खेल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए.बेहतर सड़क, खेल मैदान, उपकरण और नियमित इवेंट जरूरी हैं.
अधिकारियों के मुताबिक सरकार धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ा रही है. सर्दियों में कनेक्टिविटी के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की गई है.कुल मिलाकर, गुरेज घाटी अब सर्दियों की मुश्किलों को खेल और उम्मीद में बदल रही है.
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