'लाशें कचरे की तरह फेंकी गईं', कटक अस्पताल अग्निकांड के चश्मदीदों के गंभीर आरोप, 10 मरीजों की गई जान

कटक के SCB मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगी आग में 10 मरीजों की मौत हो गई. चश्मदीदों ने आरोप लगाया कि धुआं तेजी से फैला और उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया, प्रशासन तैयार नहीं था और शवों को लापरवाही से बाहर फेंका गया. परिजन जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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  • ओडिशा के कटक स्थित SCB मेडिकल कॉलेज में लगी आग में 10 मरीजों की मृत्यु हुई और कई घायल हुए हैं.
  • आग लगते ही ICU वार्ड में धुआं तेजी से फैल गया और मरीज सांस लेने में गंभीर रूप से परेशान हुए.
  • परिजन और चश्मदीदों ने अस्पताल प्रशासन पर आपातकालीन तैयारियों की कमी और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं.
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ओडिशा के कटक स्थित SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लगी भीषण आग में 10 मरीजों की मौत हो गई. घटना के बाद अब चश्मदीदों और मृतकों के परिजनों के चौकाने वाले बयान सामने आ रहे हैं, जिनमें अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं.

आग लगते ही वार्ड में मचा हाहाकार

ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि जैसे ही ICU में आग लगी, धुआं कुछ ही मिनटों में पूरे वार्ड में फैल गया, जिससे कई मरीज सांस लेने के लिए तड़पने लगे. मरीज और उनके परिजन बेबस होकर इधर‑उधर भागते रहे, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी.

परिजनों का कहना है कि 'अगर हमें अंदर जाने दिया जाता, तो हम अपने परिजनों को बचा लेते. हमें बाहर धकेल दिया गया और लोग अंदर जलते रह गए.'

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चश्मदीदों के गंभीर आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि मैंने अपनी आंखों से आग लगते देखी. हमें वार्ड में जाने नहीं दिया गया, वरना हम कई जान बचा लेते. मृतकों के शवों को बाहर ऐसे फेंका जा रहा था जैसे कचरा हो. पूरी घटना के लिए अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार है. इन आरोपों ने प्रशासन की कार्यशैली और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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मरीज के बेटे की दर्दनाक दास्तान

अस्पताल में भर्ती मरीज मधुसूदन दलाई की आग में मौत हो गई. उनके बेटे ने बताया, 'मैं बाहर ही था… अचानक आग लगी और मेरे पिता को कहीं और शिफ्ट कर दिया गया. बाद में फोन आया कि वे नहीं रहे. वह हेड‑इंजरी से उबर रहे थे और कुछ दिनों में जनरल वार्ड में शिफ्ट होने वाले थे. लेकिन आग ने उन्हें छीन लिया.'

एक और परिजन का बयान

ICU के वेटिंग रूम में सो रहे एक शख्स ने बताया, 'लोग चिल्लाते हुए आए- भागो, आग लग गई है! मैंने अंदर जाकर अपने मरीज को निकालने की बात कही, लेकिन सिक्योरिटी ने रोक दिया. अगर हमें रोका न गया होता, तो हम कई मरीज बचा लेते.'

जांच और जिम्मेदारी पर बड़े सवाल

चश्मदीदों की मानें तो अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था नाकाम रही. रेस्पॉन्स टाइम बेहद धीमा था. धुआं नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था नहीं दिखी. 

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