- चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर दी हैं.
- देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के लिए ये चुनाव बेहद अहम है. केरल और पुडुचेरी में कांग्रेस टक्कर में है.
- असम में कांग्रेस को चमत्कार की उम्मीद है. तमिलनाडु में स्टालिन तो बंगाल में कांग्रेस का हाल राम भरोसे है.
रविवार को चुनाव आयोग ने 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित कर दी है. देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) के लिए ये चुनाव बेहद अहम हैं. 5 में से 3 जगह यानी असम, केरल और पुडुचेरी में कांग्रेस मुख्य मुकाबले में है. इन तीनों विधानसभाओं के लिए 9 अप्रैल यानी ठीक 25 दिन बाद वोट डाले जाएंगे. कांग्रेस को केरल से काफी उम्मीदें हैं. अगर केरल में कांग्रेस जीत गई तो यह उसके लिए संजीवनी जैसा साबित हो सकता है. वहीं अगर हार हुई तो पार्टी का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा. पुडुचेरी को भी कांग्रेस बोनस के रूप में देख रही है. इसके अलावा असम में कांग्रेस चमत्कार, तमिलनाडु में स्टालिन और बंगाल में भगवान भरोसे है!
केरल में कांग्रेस के लिए मौका लेकिन प्रतिष्ठा भी दांव पर
केरल में कांग्रेस के लिए अच्छा मौका है लेकिन साथ ही प्रतिष्ठा भी दांव पर है. केरल में बीते दस सालों से CPM की सरकार है. दस सालों की एंटी इंकम्बेंसी और हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन के कारण कांग्रेस की अगुवाई में UDF का जोश हाई है. हालांकि पार्टी को जमीनी रिपोर्ट यह मिल रही है कि विधानसभा चुनाव में मुकाबला आसान नहीं रहने वाला.
प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल की अग्निपरीक्षा
कांग्रेस को डर है कि BJP अपना वोट CPM को ना ट्रांसफर कर दे! इसके अलावा अपने वरिष्ठ नेताओं के बीच आपसी खींचतान कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है. इसी के मद्देनजर कांग्रेस ने किसी भी सांसद को विधानसभा चुनाव में नहीं उतारने का फैसला किया है. प्रियंका गांधी केरल से ही सांसद हैं. विधानसभा चुनाव में उनकी और कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की अग्नि परीक्षा होनी है.
केरल में 20 विधायकों को रिपीट कर सकती है कांग्रेस
केरल में नामांकन की आखिरी तारीख 23 मार्च है. यानी अगले कुछ दिनों में ही कांग्रेस को अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करना होगा. कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति ने 31 सीटों पर उम्मीदवार तय कर दिए हैं. पिछली बार जीती हुई 22 सीटों में से 20 पर कांग्रेस अपने विधायकों को दुबारा मौका देने जा रही है. राज्य की 140 विधानसभा सीटों में यूडीएफ के तहत करीब 95 सीटों पर कांग्रेस और 45 पर उसके सहयोगी दल चुनाव लड़ते हैं.
असम में 10 साल से सत्ता से दूर है कांग्रेस
असम विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस दस सालों से सत्ता से बाहर है. राज्य के मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं है. इसीलिए पार्टी ऊपरी असम में अहोम समुदाय को साधने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विरासत और उनके बेटे गौरव गोगोई के चेहरे पर दांव लगा रही है. जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई को पिछले साल असम प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई और उन्हें जोरहाट से विधानसभा का चुनाव भी लड़वाया जा रहा है.
बीटीआर में कोई स्थानीय सहयोगी नहीं
असम में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि BTR यानी बोडोलैंड टेरीटोरियल रीजन की 15 सीटों पर उसके पास कोई स्थानीय सहयोगी नहीं है. इसके अलावा गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन के तौर तरीकों से असम कांग्रेस के बाक़ी वरिष्ठ नेता असहज हैं. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने चुनाव से ठीक पहले बीजेपी का दामन थाम लिया.
हिमंता की लोकप्रियता के सामने गौरव गोगोई को करना होगा करिश्मा
कांग्रेस ने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने की योजना बनाई है लेकिन उसे अहसास है कि राज्य में ध्रुवीकरण के माहौल और हिमंता की लोकप्रियता के आगे उसकी मुहिम अब तक जोर नहीं पकड़ पाई है. कांग्रेस आलाकमान ने असम में प्रियंका गांधी को टिकट बांटने की ज़िम्मेदारी दी और डीके शिवकुमार, भूपेश बघेल जैसे नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया लेकिन असल करिश्मा तो गौरव गोगोई को ही करना पड़ेगा जो ख़ुद ही अभी राज्य में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं.
पुडुचेरी में कांग्रेस टक्कर में
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में है. तमिलनाडु में दोनों दलों में सीट बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी है लेकिन पुडुचेरी में अब तक पेंच फंसा हुआ है. राज्य में फिलहाल NDA की सरकार में एनआर कांग्रेस के नटेशन रंगास्वामी सीएम हैं. तीस सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास अपना सीएम बनाने का मौका लेकिन इसके लिए मुकाबला बेहद कड़ा है.
तमिलनाडु में कांग्रेस पूरी तरह से स्टालिन के भरोसे
तमिलनाडु में कांग्रेस पूरी तरह डीएमके के भरोसे है. स्टालिन सरकार के सामने एंटी इंकम्बेंसी की चुनौती है. हालांकि सत्ता विरोधी वोट एनडीए और टीवीके के बंटा तो डीएमके गठबंधन की बम्पर जीत भी हो सकती है. इस गठबंधन में कांग्रेस को 28 सीटें मिली हैं जो पिछली बार से 3 ज़्यादा है.
पश्चिम बंगाल में भगवान भरोसे कांग्रेस
बंगाल में TMC बनाम BJP की लड़ाई में कांग्रेस के पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा. ऐसे में पार्टी ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. पार्टी का मुख्य फोकस मालदा–मुर्शिदाबाद के इलाके की मुस्लिम बहुल इलाके की सीटों पर है जो कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस वामदलों के साथ चुनाव लड़ी लेकिन खाता नहीं खुल पाया. हालांकि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में मालदा दक्षिण सीट पर जीत दर्ज की.
तमिलनाडु में 23 अप्रैल, बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी और सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को आएंगे. अब देखना होगा कि 4 मई को जब इन 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे तो कांग्रेस एक नए तेवर के साथ आगे बढ़ती दिखेगी या हार के कारण फिर घिसी-पिटी तर्कें गिनाती नजर आएगी.
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