'सपा को पूजना है तो पूजें, हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता...' : यूपी विधानसभा में बोले CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपको पूजना है सपा के लोग तो पूजें, लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं, कानून का शासन पर विश्वास करते हैं. कानून का पालन करना भी जानते हैं और पालन करवाना भी जानते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने माघ मेले में शंकराचार्य को गंगा में डुबकी लगाने से रोकने का आरोप लगाया था.
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य के पद का सम्मान करते हुए नियमों के उल्लंघन को अस्वीकार किया.
  • योगी ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी को भी नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
लखनऊ:

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि माघ मेले के दौरान एक पूजनीय शंकराचार्य को गंगा में डुबकी लगाने जैसी पुरानी परंपराओं का पालन करने से रोका गया, जो कि सनातन धर्म के विरुद्ध है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि संतों को रोकने वाला व्यक्ति 'सच्चा सनातनी' नहीं हो सकता. अब अखिलेश यादव के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया.

CM योगी ने कहा कि शंकराचार्य का पद अत्यंत सम्मानित है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई भी नियमों और मर्यादाओं को ताक पर रख दे. उन्होंने कानून की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा, "कानून किसी के लिए अलग नहीं होता और किसी को भी नियमों के उल्लंघन की इजाजत नहीं दी जा सकती. कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है. अगर वह शंकराचार्य थे तो क्यों आप लोगों ने लाठीचार्ज किया था वाराणसी में?

'कानून का शासन पर विश्वास करते हैं...'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपको पूजना है सपा के लोग तो पूजें, लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं, कानून का शासन पर विश्वास करते हैं. कानून का पालन करना भी जानते हैं और पालन करवाना भी जानते हैं.

मुख्यमंत्री ने बताया कि माघ मेले में जहां 4.5 करोड़ श्रद्धालु मौजूद हों, वहां किसी भी मार्ग को जाम नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रतिबंधित मार्ग से जबरन अंदर जाने की कोशिश करता है, तो वहां भगदड़ जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती था, जो किसी भी 'मर्यादित व्यक्ति' को शोभा नहीं देती.

प्रयागराज माघ मेले में क्या हुआ था? 

प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने अनुयायियों के साथ रथ पर सवार होकर पोंटून पुल नम्बर दो से संगम जाना चाहते थे. प्रशासन ने उन्हें उधर रथ से जाने से मना किया और कहा कि जाना है तो पैदल ही जाना होगा. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे शंकराचार्य पद का अपमान बताते हुए वहीं धरना शुरू कर दिया. इसके बाद उन्होंने माघ मेले में स्नान का बहिष्कार कर दिया. 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनशन के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें दो नोटिस थमा दिया. पहली नोटिस में उनके शंकराचार्य पद विवाद के सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने का हवाल देते हुए पूछा गया कि वो ख़ुद को शंकराचार्य कैसे कह सकते हैं. दूसरी नोटिस में नियम ना मानने पर मेले में दी गई सुविधा को वापस क्यों ना ले लिया जाये, ये पूछा गया. इन नोटिसेज़ को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीधे सरकार पर हमला कर दिया था. 

Advertisement

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हरियाणा के एक कार्यक्रम में इशारों में कालनेमि कहा तो माना गया कि ये टिप्पणी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए है. हालांकि इसके बाद सीएम ने खुलकर कभी इस पूरे विवाद पर कुछ नहीं कहा. शुक्रवार को बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सीएम योगी ने खुलकर अपनी बात रख दी. अब माना जा रहा है कि शंकराचार्य विवाद सीएम के बयान के बाद फिर से तूल पकड़ सकता है.

ये भी पढ़ें :  बाबर की कब्र में सजदा का जो समर्थन करते हैं... वंदे मातरम गाने का विरोध करने वालों को सीएम योगी ने सुना दिया 

Advertisement
Featured Video Of The Day
Ajmer News: लग्जरी गाड़ियां, धुएं के छल्ले उड़ाते छात्र, Farewell के बाद रईसजादों का ये वीडियो वायरल