दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने गुरुवार को एक संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार एक तरफ जहां अपने अमीर उद्योगपतियों दोस्तों के कर्जे माफ कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ गरीब जनता के खाने-पीने के चीजों पर टैक्स बढ़ा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर केंद्र सरकार अमीर उद्योगपतियों और अपने दोस्तों के लाखों करोड़ों के कर्ज माफ नहीं करती तो आज गरीब लोगों से खाने-पीने की चीजों पर ज्यादा टैक्स नहीं लगाना पड़ता. केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने सिर्फ अपने दोस्तों और बड़े उद्योगपतियों के कर्जे ही माफ नहीं किए हैं बल्कि उन्हें टैक्स में भी छूट दी है. सरकार ने बीते कुछ समय में बड़े उद्योगपतियों के 5 लाख करोड़ रुपये के टैक्स भी माफ कर चुकी है.
केजरीवाल ने कहा कि मनरेगा के लिए केंद्र सरकार के पास पैसे नहीं हैं. उन्होंने सवाल किया कि सरकारी स्कूल में फीस लगने लगे तो गरीब का बच्चा कहां पढ़ेगा? सरकारी अस्पताल में मरीजों को पैसा लगने लगा तो गरीब अपना इलाज कहां कराएगा? केंद्र कह रही है फ्री का राशन भी बंद होगा. ये नहीं होना चाहिए. 2014 में केंद्र सरकार का बजट लगभग 20 लाख करोड़ का था जो आज लगभग अब 40 लाख करोड़ का है. ये पैसे जा रहा है. ये सरकारी पैसों से अपने बड़े उद्योगपतियों का कर्जा माफ कर रहे हैं.
केंद्र सरकार ने बड़े उद्योगपतियों के 5 लाख करोड़ रुपये के टैक्स भी माफ किए हैं. एक तरफ गरीब लोगों के खाने पीने के चीजों पर टैक्स लगा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अपने अमीर दोस्तों के टैक्स माफ कर दिया. इस देश का आम नागरिक आज ठगा हुआ महसूस कर रहा है. क्या ये देश चंद लोगों के लिए चल रहरा है. ऐसा रहा तो देश कंगाल हो जाएगा.
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