- भारत में 2027 की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसमें पहली बार सेल्फ-एन्युमरेशन का विकल्प उपलब्ध होगा
- 1 अप्रैल से आठ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहले चरण की शुरुआत हुई जिसमें हाउस लिस्टिंग का काम शामिल है
- पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित प्रधानमंत्री ने सेल्फ-एन्युमरेशन फॉर्म भरकर अभियान की शुरुआत की
जनगणना का काम आज से शुरू हो गया है. आजाद भारत की यह 8वीं जनगणना है. 2027 की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी. 2027 की जनगणना दो चरणों में होगी और 1 अप्रैल से इसका पहला चरण शुरू हो गया है. पहले चरण में हाउस लिस्टिंग का काम पूरा होगा. पहली बार न सिर्फ जनगणना पूरी तरह से डिजिटल है, बल्कि पहली बार सेल्फ-एन्युमरेशन का विकल्प भी दिया जा रहा है. अब लोग घर बैठे ही अपना फॉर्म भर सकते हैं.
पहले दिन सबसे पहले राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने सेल्फ-एन्युमरेशन फॉर्म भरकर जनगणना अभियान की शुरुआत की. उनके बाद उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ऑनलाइन सेल्फ-एन्युमरेशन फॉर्म भरा.
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पहले दिन 55,000 लोगों ने भरा फॉर्म
2027 की जनगणना के पहले चरण में 1 अप्रैल से सेल्फ-एन्युमरेशन प्रक्रिया 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू की गई है. इनमें अंडमान-निकोबार, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली में ये प्रक्रिया शुरू हुई. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, पहले दिन इन जगहों से 55 हजार से ज्यादा लोगों ने सेल्फ-एन्युमरेशन फॉर्म भरा.
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क्या है सेल्फ-एन्युमरेशन सुविधा?
सेल्फ-एन्युमरेशन के लिए लोगों को अपने मोबाइल नंबर और दूसरी डिटेल से पोर्टल में लॉग-इन करना होगा और अपना फॉर्म भरना होगा. फॉर्म सबमिट होने के बाद एक सेल्फ-एन्युमरेशन आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे एन्युमरेटर के साथ साझा करना होगा. इस पोर्टल का फायदा ये होगा कि लोगों को एन्युमरेटर के आने से पहले ही अपनी सुविधा के हिसाब से जानकारी भर सकते हैं.
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कैसे होगी इस बार जनगणना?
2027 की जनगणना दो चरणों में पूरी होगी. पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक चलेगा. इसमें हाउस लिस्टिंग का काम किया जाएगा. दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें लोगों की गिनती की जाएगी. हालांकि, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह चरण सितंबर 2026 में ही शुरू हो जाएगा. इस चरण में जातियों की गिनती भी की जाएगी.
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