- वित्त मंत्री ने 53.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया जो पिछले बजट से 5.5 प्रतिशत अधिक है.
- बजट भाषण में टैक्स शब्द का 156 बार, आय का 98 बार और मैन्युफैक्चरिंग का 89 बार उल्लेख कर आर्थिक उन्नति पर जोर.
- ड्यूटी/शुल्क का 53 बार और कस्टम्स का 47 बार उल्लेख कर व्यापार और सीमा शुल्क नीतियों को प्रमुखता दी गई है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 53.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक बजट पेश कर दिया है, जो पिछले बजट अनुमान की तुलना में 5.5 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है. यह बजट न केवल विकास की निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि 2047 तक के एक सुदृढ़ रोडमैप को भी प्रस्तुत करता है. इस बार के बजट भाषण की सबसे खास बात इसकी शब्दावली रही. भाषण के दौरान कुछ प्रमुख शब्दों का बार-बार प्रयोग यह बताता है कि सरकार का विजन इस साल किन स्तंभों पर टिका है.
ड्यूटी/शुल्क का 53 बार और कस्टम्स का 47 बार उल्लेख
भाषण के दौरान टैक्स शब्द का सर्वाधिक 156 बार प्रयोग किया गया. इसके बाद आय (98 बार) और मैन्युफैक्चरिंग (89 बार) जैसे शब्दों पर विशेष जोर दिया गया, जो आत्मनिर्भर भारत और आम आदमी की आर्थिक उन्नति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है. व्यापार और सीमा शुल्क से संबंधित विषयों को भी प्रमुखता मिली, जिसमें ड्यूटी/शुल्क का 53 बार और कस्टम्स का 47 बार उल्लेख किया गया.
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ऊर्जा का 37 बार और कंपनियां शब्द का 31 बार प्रयोग
देश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी जरूरतों को भी भाषण में उचित स्थान मिला. वित्त मंत्री ने विकास शब्द का 41 बार, ऊर्जा का 37 बार और कंपनियां शब्द का 31 बार प्रयोग किया. औद्योगिक गतिविधियों और सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रोसेसिंग (29 बार), निर्यात (28 बार) और सरकार (28 बार) जैसे शब्दों का बार-बार जिक्र हुआ. साथ ही, सामाजिक और तकनीकी उन्नति के लिए स्वास्थ्य (28 बार), प्रशिक्षण (23 बार), रोजगार (20 बार) और तकनीक (19 बार) जैसे विषयों को भी महत्वपूर्ण माना गया.
बजट भाषण में करदाता (22 बार) और MAT (20 बार) जैसे तकनीकी शब्दों का प्रयोग हुआ, वहीं दूसरी ओर शिक्षा (16 बार), इन्फ्रास्ट्रक्चर (15 बार), किसान (12 बार) और उभरती हुई तकनीक AI (12 बार) पर भी चर्चा की गई. इसके अलावा, छोटे उद्योगों और क्षेत्रीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से MSME (7 बार), नारियल (6 बार) और नवाचार (6 बार) जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया.
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