बीजेपी अध्‍यक्ष नितिन नवीन की बनने जा रही टीम, जानें किस-किस को मिल सकती है एंट्री?

बीजेपी के नए अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन पांच मई के बाद हो सकता है, जिसमें युवा और अनुभवी नेताओं को शामिल किया जाएगा. बीजेपी पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय पदाधिकारियों में महिलाओं के लिए तीस प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य है, साथ ही एससी-एसटी के लिए भी पद आरक्षित हैं.

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  • बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनाव परिणाम के बाद होगा
  • नई टीम में 50 वर्ष से कम उम्र के युवा नेताओं को शामिल कर भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार किया जाएगा
  • बीजेपी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय पदाधिकारियों में कम से कम 33% महिलाएं अनिवार्य हैं
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नई दिल्‍ली:

बीजेपी के नए अध्‍यक्ष नितिन नवीन की टीम बनने जा रही. पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चार मई को परिणाम आने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन होने की संभावना है. पार्टी नेताओं के अनुसार, इसके लिए होम वर्क पूरा कर लिया गया है. माना जा रहा है कि युवा अध्यक्ष के साथ काम करने के लिए बनाई जाने वाली टीम में अनुभवी नेताओं के साथ ही युवाओं को भी मौका दिया जाएगा, ताकि भविष्य के लिए नेतृत्व तैयार किया जा सके. 

50 साल से कम उम्र के नेताओं की बन रही लिस्‍ट 

नितिन नवीन 20 जनवरी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे. उसके बाद से ही उनकी नई टीम के गठन को लेकर इंतजार हो रहा है. सूत्रों के अनुसार, इसके लिए देश भर में नेताओं की सूची तैयार की गई है. 50 वर्ष के कम उम्र के नेताओं की इस सूची के बारे में वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया है. इसी के आधार पर जल्दी ही नितिन नवीन की टीम की घोषणा होगी.

क्‍या कहता है बीजेपी का संविधान?
 

दरअसल, बीजेपी संविधान के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष की सहायता के लिए पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाती है. इनमें अधिकतम 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, नौ राष्ट्रीय महामंत्री (जिनमें एक महामंत्री संगठन भी शामिल है) और 15 मंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है. एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की नियुक्ति भी की जाती है. बीजेपी संविधान में किए गए संशोधन के अनुसार 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं. इसका मतलब है कि कुल 38 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में से कम से कम 13 महिलाएं होना अनिवार्य हैं. साथ ही, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रत्येक वर्ग में से कम से कम तीन पदाधिकारी होने आवश्यक हैं. 

BJP पार्लियामेंट्री बोर्ड का भी होगा गठन

राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति के साथ ही पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड का भी गठन होगा. वैसे तो इसमें अध्यक्ष को मिला कर अधिकतम 11 सदस्य हो सकते हैं लेकिन फिलहाल इसमें 12 सदस्य हो गए हैं. क्षेत्रीय, सामाजिक और धार्मिक संतुलन बैठाने के लिए इसका भी पुनर्गठन होगा. इसके अलावा केंद्रीय चुनाव समिति का भी गठन होना है जिसमें पार्लियामेंट्री बोर्ड के सभी सदस्यों के साथ ही कुछ अन्य नेताओं को भी शामिल किया जाता है. अभी महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और महिला मोर्चा की अध्यक्ष वी श्रीनिवासन इसकी सदस्य हैं. 

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ऐसी होती है बीजेपी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी 

नितिन नवीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन करेंगे. यह पार्टी की मुख्य कार्यकारी संस्था है. इसमें अध्यक्ष के अलावा अधिकतम 120 सदस्य हो सकते हैं. इनमें भी कम से कम 40 महिलाएं और 12 सदस्य एससी-एसटी वर्ग से होने आवश्यक हैं. साथ ही, राष्ट्रीय अध्यक्ष आवश्यकतानुसार विशेष आमंत्रित तथा स्थायी आमंत्रित सदस्यों को भी मनोनीत कर सकते हैं. राष्ट्रीय परिषद का भी गठन होगा जिसमें राज्य परिषदों द्वारा निर्वाचित सदस्य, संसदीय दल के 10 प्रतिशत सदस्य, पार्टी के सभी पूर्व अध्यक्ष और राज्यों की विधानसभाओं और विधान परिषदों के नेता, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी सदस्य, पार्टी के सभी राष्ट्रीय मोर्चों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा अधिकतम 20 मनोनीत सदस्य होते हैं. 

कई नए चेहरों की होगी एंट्री 

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय महासचिवों में कई नए चेहरे लाए जाएंगे. इन्हें राज्यों से लाया जाएगा ताकि राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार की जा सके और युवा अध्यक्ष के साथ काम करने में सहजता रहे. हालांकि वर्तमान अनुभवी महासचिवों विनोद तावड़े, सुनील बंसल और तरुण चुग को नई टीम में भी जगह मिलने की संभावना है. नई टीम में महिलाओं को खासतौर से तवज्जो दी जाएगी ताकि महिला आरक्षण को लेकर मोदी सरकार की पहल पर बल दिया जा सके. वैसे भी मोदी सरकार चाहती है कि 2029 के लोक सभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया जाए. इस तरह पार्टी महिलाओं का भी नया नेतृत्व तैयार करना चाह रही है. पीएम मोदी ने वंशवाद और जातिवाद को खत्म करने के लिए बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि के एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने की बात कही है. टीम के गठन में इस सोच की झलक भी दिखाई देगी. 

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पार्टी नेताओं के अनुसार जिस तरह स्वयं नितिन नवीन के चयन को लेकर आरएसएस और बीजेपी नेताओं में लंबा मंथन चला, ठीक वैसे ही उनकी टीम को लेकर भी गहन मंत्रणा हुई है. आरएसएस चाहता है कि ऐसे लोगों को जगह मिले जो विचारधारा के लिए प्रतिबद्ध हों और संगठन को मजबूत दे सकें. वे कार्यकर्ताओं से जीवंत संपर्क रख सकें और आने वाले 15-20 वर्षों के लिए पार्टी की दशा और दिशा तय कर सकें. इस लिहाज से नितिन नवीन की टीम काफी महत्वपूर्ण साबित होने जा रही है.

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