AIMIM के समर्थन के बाद भी RJD की राह मुश्किल, जानें बिहार राज्यसभा चुनाव में 5वीं सीट का गुणा-गणित

बिहार में राज्यसभा की 5वीं सीट के लिए खींचतान तेज है. NDA विपक्षी विधायकों को एब्सेंट कराकर विनिंग कोटा 41 से 40 पर लाने की रणनीति पर काम कर रहा है.

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  • बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए मतदान में NDA चार सीटें सीधे तौर पर जीत जाएगा, पांचवीं सीट पर मुकाबला है
  • NDA विपक्षी विधायकों को एब्सेंट कराने की कोशिश कर रहा है ताकि जीत के लिए कोटा घटकर चालीस हो जाए
  • कांग्रेस के कई विधायक मतदान में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ गई है
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बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए सोमवार को मतदान होना है. संख्याबल के हिसाब से एनडीए चार सीटें सीधे तौर पर जीत जाएगा. पांचवी सीट पर दोनों गठबंधन जीत का दावा कर रहे हैं. एनडीए की कोशिश है कि विपक्षी खेमे के विधायकों को एब्सेंट होने के लिए तैयार कर लिया जाए. ऐसा होने पर जीत के लिए निर्धारित कोटा 41 से घटकर 40 हो जाएगा और एनडीए के सभी उम्मीदवारों की जीत आसान हो जाएगी. एनडीए ने सबसे अधिक जोर कांग्रेस के विधायकों पर लगाया है. रविवार को कांग्रेस के सभी विधायक न तो पनाश होटल पहुंचे और न ही अख्तरूल ईमान की इफ्तार पार्टी में कांग्रेस का कोई विधायक दिखा. इससे उन कयासों को बल मिला है कि कांग्रेस के विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं.

AIMIM के समर्थन के बावजूद आसान नहीं RJD की राह!

अगर RJD को AIMIM का समर्थन मिल जाता है तब भी उनके उम्मीदवार की राह आसान नहीं है. तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद भी अख्तरूल ईमान ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि AIMIM राजद को समर्थन दे देगा. पार्टी के पांच विधायक हैं. हालांकि सभी विधायक RJD को समर्थन देने के पक्ष में नहीं हैं. RJD को उम्मीद है कि पूरे विपक्षी खेमे का समर्थन उसे मिलेगा और अमरेंद्र धारी सिंह जीत जाएंगे. लेकिन RJD भी कई विधायकों को लेकर सशंकित है. इसलिए अब सभी विधायकों को होटल पनाश में रुकने कहा गया है. यहीं से विधायक वोट डालने जाएंगे. लेकिन कांग्रेस के 3 विधायक पनाश होटल नहीं पहुंचे हैं. होटल न पहुंचने वाले कांग्रेस के एक विधायक ने कहा कि अभी सभी तरफ से दबाव है, हम भले ही होटल नहीं पहुंचे हैं लेकिन हमें पता है कि हमें कहां वोट करना है.

एनडीए क्रॉस वोटिंग के साथ-साथ विपक्षी खेमे के विधायकों को एब्सेंट कराने की रणनीति पर भी काम कर रहा है. भाजपा के एक नेता ने बताया कि जो विपक्षी विधायक हमें वोट करने के लिए तैयार नहीं हैं, हमने उन्हें एब्सेंट होने के लिए मनाया है. ताकि विनिंग कोटा 41 से घट जाए और हमारे उम्मीदवार की जीत हो जाए.

राज्यसभा चुनाव में मौजूदा स्थिति के अनुसार एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. लेकिन अगर 4 विधायक भी एब्सेंट हो जाते हैं तो उम्मीदवार को जीत के लिए सिर्फ 40 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी. ऐसे में 40 से अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवारों के प्रथम वरीयता का 1 वोट दूसरे वरीयता का वोट पाने वाले उम्मीदवार को ट्रांसफर हो जाएगा. इसलिए NDA की कोशिश क्रॉस वोटिंग के साथ-साथ विधायकों को एब्सेंट कराने की है. एनडीए खेमे के कई नेता मान कर चल रहे हैं कि बसपा के इकलौते और कांग्रेस के दो विधायक उन्हें फायदा पहुंचाएंगे. यह विधायक या तो एब्सेंट हो जाएंगे या वे वोट डालने में गड़बड़ी कर सकते हैं.

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2016 में फर्स्ट प्रिफरेंस के कम वोट के बावजूद जीते थे सुभाष चंद्रा

2016 में हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में 14 विधायकों के वोट रद्द होने के कारण सुभाष चंद्रा को जीत मिली थी. हरियाणा में 90 विधायक हैं. भाजपा के बीरेन्द्र सिंह को 40 वोट मिले थे, कांग्रेस के आरके आनंद को 21 और सुभाष चंद्रा को 15 वोट मिले थे जबकि 14 विधायकों के वोट रद्द हो गए थे. ऐसे में उम्मीदवार को जीतने के लिए सिर्फ 26 वोटों की आवश्यकता रह गई थी. इसलिए बीरेंद्र सिंह के 14 वोट सुभाष चंद्रा को ट्रांसफर हो गए क्योंकि इन सभी विधायकों ने दूसरी वरीयता का मत सुभाष चंद्रा को दिया था. इसलिए सुभाष चंद्रा चुनाव जीत गए. एनडीए इस फॉर्मूला को ध्यान में रख कर यह तैयारी कर रहा है.

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