- लद्दाख में अब कुल सात जिले होंगे जिनमें नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास नए जिले शामिल हैं
- नए जिलों का गठन प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया है
- नए जिलों से स्थानीय लोगों को प्रशासनिक सेवाएं और सरकारी सुविधाएं उनके निकट स्थान पर उपलब्ध होंगी
लद्दाख में अब दो नहीं बल्कि सात जिले होंगे. लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश में पांच नए जिलों के गठन की घोषणा की. अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख के उपराज्यपाल ने नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास नामक पांच नए जिलों के गठन की घोषणा की है. अब तक लद्दाख में केवल दो जिले लेह और कारगिल हैं. लद्दाख के लोग लंबे समय से नए जिलों की मांग कर रहे थे. आखिर ये नए जिले क्यों बनाए गए हैं और इससे क्या फायदा होगा? आइए समझते हैं.
नए जिलों की क्या है खासियत?
- नुब्रा अपने रणनीतिक स्थान और उच्च ऊंचाई के लिए जाना जाता है, जिसका उद्देश्य पर्यटन अवसंरचना का विकास करना है.
- शाम अपने क्षेत्र में स्थानीय शासन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है.
- चांगथांग प्राचीन जनजातियों के संरक्षण और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने को प्राथमिकता देता है.
- जांस्कर, सड़क संपर्क और पर्यटन में सुधार पर ध्यान केंद्रित करता है.
- द्रास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और सेना के अड्डे को सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है और अपने रणनीतिक महत्व के लिए जाना जाता है.
नए जिलों के गठन से क्या होगा फायदा?
- इस कदम का उद्देश्य प्रशासन का विकेंद्रीकरण करना, दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना और बेहतर शासन के लिए लंबे समय से लंबित स्थानीय मांगों को पूरा करना है.
- अब स्थानीय लोगों को प्रशासनिक कामों के लिए 300 किमी से अधिक की दूरी तय करके लेह या कारगिल नहीं जाना पड़ेगा. सरकारी दफ्तर और सेवाएं अब उनके घरों के करीब होंगी.
- नए जिला मुख्यालय बनने से सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों के निर्माण को गति मिलेगी.
- नए प्रशासनिक पदों के सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरी के नए अवसर पैदा होंगे.
- केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं अब सुदूर और सीमावर्ती क्षेत्रों के लाभार्थियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी.
- छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों के कारण पर्यटन स्थलों का प्रबंधन बेहतर होगा और नए पर्यटन केंद्रों को विकसित करने में मदद मिलेगी.
राज्य के दर्जे की भी हो रही मांग
लद्दाख के दो प्रतिनिधि निकाय, लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) 2021 से ही राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल किए जाने, नौकरी की सुरक्षा और लोक सेवा आयोग की मांग को लेकर सक्रिय रूप से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. चेरिंग दोरजे और सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में एलएबी केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ इन मांगों पर बातचीत करने के लिए केडीए के साथ मिलकर काम करता है.
सोनम वांगचुक को किस बात की चिंता?
जब 2024 में केंद्र सरकार ने लद्दाख में नए 5 जिलों को मंजूरी दी थी, तब सोनम वांगचुक ने इसे लेकर कुछ आशंकाएं भी जाहिर की थी. उन्होंने सवाल किया था कि ये नए जिले केवल प्रशासनिक इकाइयां होंगे या लोकतांत्रिक इकाइयां. उन्हें डर है कि नए जिले बनाना छठी अनुसूची की मुख्य मांग से ध्यान भटकाने का एक तरीका हो सकता है. उन्हें चिंता है कि बिना किसी विशेष सुरक्षा (जैसे छठी अनुसूची) के, नए जिलों के बनने से बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों और ज़मीन पर संकट आ सकता है.
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